विश्व शांति, मानवता और परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया का स्वरूप हो, वर्तमान में इसकी दरकार है। इसी उद्देश्य को लेकर हर वर्ष की भांति आज हिरोशिमा दिवस मनाया जाएगा। यह दिवस वर्ष, 1945 में हुए हिरोशिमा पर हुए परमाणु बम हमले की याद दिलाता है, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर पहला युद्धकालीन परमाणु बम गिराया था। इस बम का नाम लिटल बॉय था। इसके तीन दिन बाद 9 अगस्त 1945 को नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम फैट मैन गिराया गया। इन हमलों के बाद जापान ने आत्मसमर्पण किया और द्वितीय विश्व युद्ध समाप्ति की ओर बढ़ा। यह दिन परमाणु हथियारों की विनाशकारी शक्ति और युद्ध के मानवीय दुष्परिणामों की याद दिलाता है। दुनिया भर में शांति, अहिंसा और परमाणु निरस्त्रीकरण का संदेश दिया जाता है। हमले में मारे गए और विकिरण से प्रभावित लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है। भविष्य में ऐसे विनाशकारी हथियारों के उपयोग को रोकने के लिए वैश्विक सहयोग पर जोर दिया जाता है। यह दिन किसी एक शहर या एक देश तक सीमित नहीं है। जापान और दुनिया भर में इसे एक गंभीर अवसर के रूप में याद किया जाता है जो युद्ध की मानवीय कीमत और शांति शिक्षा, स्मरण और अहिंसा के निरंतर महत्व को उजागर करता है। सीधे अर्थों में हम कहे सकते हैं कि यह दिवस ऐतिहासिक स्मृति को संरक्षित करने, मृतकों या पीडि़तों के प्रति सम्मान जताने और आने वाली पीढिय़ों को शांति का महत्व सिखाने के लिए मनाया जाता है। बदलते समय के अनुरूप हिरोशिमा और दुनिया भर में स्मरणोत्सव गतिविधियां महज ऐतिहासिक स्मरण से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गईं। वे व्यापक शांति प्रयासों, युद्ध-विरोधी चिंतन और परमाणु निरस्त्रीकरण पर चर्चा का भी हिस्सा बनती जा रही है। यही कारण है कि 1945 के कई दशकों बाद भी हिरोशिमा दिवस का महत्व आज भी बना हुआ है।

