Thursday, July 9, 2026 |
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मानसून के आरंभ में ही सडक़ों की बदहाली

by Business Remedies
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देश के कई राज्यों में मानसून की शुरुआत हो चुकी है। खेतों को सींचने वाली यह बारिश किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, पर शहरों और गांवों की सडक़ों के लिए यह अभिशाप बन गई है। लगातार हो रही बारिश ने जगह-जगह सडक़ों को छलनी कर दिया है। दिल्ली सहित राजस्थान प्रदेश के जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर के अधिकांश जिलों में मुख्य मार्गों और गलियों में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को दूरी का अंदाजा नहीं रहता और दुर्घटनाएं आम हो गई हैं। दो पहिया वाहन चालकों की स्थिति सबसे खराब है। अचानक गड्ढे में फंसने से स्कूटर-मोटरसाइकिल पलट जाते हैं, जिससे युवा, महिलाएं और बच्चे गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। चार पहिया वाहनों की हालत भी अच्छी नहीं है। गड्ढों में उतरते ही गाडिय़ों के स्प्रिंग, शॉकअप्सर और टायर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। मरम्मत पर हर महीने सैकड़ों रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। आमजन जो बस या ऑटो से यात्रा करते हैं, उन्हें भी झटकों और देरी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चे, अस्पताल पहुंचने वाले मरीज और ऑफिस जाने वाले कर्मचारी सबसे ज्यादा परेशान हैं। यह समस्या नई नहीं है। हर वर्ष मानसून आते ही सडक़ें बिखर जाती हैं। इसका कारण सडक़ निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल, ठेकेदारों की लापरवाही और रखरखाव की पूरी तरह अनदेखी है। नगर निगम बारिश से पहले नालों की सफाई व सडक़ों की मरम्मत करता है, लेकिन यह काम भी समय पर पूरा नहीं हुआ। परिणामस्वरूप जनता की जान-माल दोनों को खतरा पैदा हो गया है। सडक़ दुर्घटनाओं में हर साल सैकड़ों मौतें होती हैं, जिनमें से कई गड्ढों के कारण होती हैं। आर्थिक नुकसान भी बहुत बड़ा है। वाहनों की मरम्मत, ईंधन की बर्बादी और काम के घंटे खराब होने से अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ रहा है। सरकार को अब जागना चाहिए। लोक निर्माण विभाग को तुरंत सडक़ सर्वेक्षण करवाना चाहिए और गड्ढों की मरम्मत के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए। जहां गुणवत्ता खराब पाई जाए, वहां ठेकेदार पर भारी जुर्माना लगाया जाए और ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही, सडक़ निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले मटेरियल का अनिवार्य इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए। नगर निगमों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। नागरिकों को भी सक्रिय होना चाहिए।



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