मुंबई,
अगले सप्ताह भारतीय Stock Market में निवेशकों की नज़र June तिमाही के नतीजों की शुरुआत, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और मुद्रा विनिमय दर के रुख पर रहेगी। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज करने के बाद बाजार अब घरेलू आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक बाजारों के संकेतों के आधार पर अपनी अगली दिशा तय कर सकता है। शुक्रवार को भारतीय प्रमुख शेयर सूचकांकों में लगातार तीसरे दिन तेजी देखने को मिली। सूचना प्रौद्योगिकी और औषधि क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी के कारण बाजार को मजबूती मिली, जबकि वैश्विक बाजारों से मिले संकेत मिश्रित रहे।
Sensex 262 अंकों यानी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,763.91 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 95 अंकों यानी 0.39 प्रतिशत चढ़कर 24,270.85 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में यह सकारात्मक रुख मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़ों की वजह से देखने को मिला। वस्तु एवं सेवा कर संग्रह में मजबूती, औद्योगिक गतिविधियों में सुधार तथा विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में लगातार विस्तार ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। अब बाजार की दिशा तय करने में कई महत्वपूर्ण कारकों की भूमिका रहेगी।
सबसे अधिक ध्यान June तिमाही के नतीजों पर रहेगा। 9 जुलाई को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज अपने Q1 FY27 के वित्तीय नतीजे जारी करेगी। इसके साथ ही कंपनियों के तिमाही परिणामों का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। हाल के तनाव के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले घटनाक्रमों पर बाजार की पैनी नज़र रहेगी। यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास आगे बढ़ते हैं या कोई नया तनाव पैदा होता है, तो उसका असर वैश्विक निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है।
इसके अलावा, ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के निर्धारित अंतिम संस्कार और उससे जुड़े संभावित राजनीतिक या कूटनीतिक घटनाक्रमों पर भी निवेशकों की निगाह रहेगी। ऐसे घटनाक्रम वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति को प्रभावित कर सकते हैं। कच्चे तेल की कीमतें भी अगले सप्ताह भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। पूरे सप्ताह तेल की कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रही क्योंकि कारोबारियों को उम्मीद है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि यदि कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज़ उतार-चढ़ाव आता है, तो उसका असर महंगाई, कंपनियों के मुनाफे और भारत के आयात व्यय पर पड़ सकता है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। शुरुआती विनिमय आंकड़ों के अनुसार, सप्ताह के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹.4,000 करोड़ की शुद्ध निकासी की। यदि यह रुख आगे भी जारी रहता है, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। मुद्रा बाजार की चाल भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। शुक्रवार को भारतीय रुपया 17पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.18 के स्तर पर बंद हुआ। डॉलर सूचकांक में कमजोरी और घरेलू शेयर बाजार में मजबूती के कारण रुपये को समर्थन मिला। आने वाले दिनों में रुपये की चाल भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती है।

