Sunday, June 28, 2026 |
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10 साल में तेजी से बढ़ी कीमतें

महंगाई की मार : आम आदमी की टूट रही कमर

by Business Remedies
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नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क | देश में बढ़ती महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की जेब पर भारी डाका डाला है। सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में महंगाई की रफ्तार काफी तेजी से बढ़ी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जहां एक तरफ रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम लोगों की मासिक कमाई स्थिर बनी हुई है। इस असंतुलन ने मध्यम और निम्न वर्ग के सामने गुजर-बसर का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

मई 2026 में महंगाई ने पकड़ी रफ्तार

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल की तुलना में मई 2026 में रिटेल (खुदरा) और थोक (होलसेल) दोनों ही महंगाई दरों में बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। वर्तमान स्थिति को दर्शाने वाले मुख्य आर्थिक आंकड़े इस प्रकार हैं-

  1. रिटेल महंगाई दर : मई 2026 में बढक़र 3.93 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है।
  2. खाद्य महंगाई दर : रसोई का बजट बिगाड़ते हुए खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 4.8 प्रतिशत तक जा पहुंची है।

वैश्विक तनाव और America-Iran जंग का असर

इस घरेलू महंगाई को हवा देने में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने बड़ी भूमिका निभाई है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर America और Iran के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस टकराव के कारण कच्चे तेल (ईंधन) की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ा है। ईंधन महंगा होने के कारण देश में न सिर्फ पेट्रोल-डीजल बल्कि अनाज, सब्जियां और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। जनता इस समय वैश्विक संकट के एक चक्रव्यूह में फंस चुकी है।

स्थिर कमाई और मुफ्त राशन पर निर्भरता

भारत में महंगाई का बढऩा इसलिए सबसे गंभीर चिंता का विषय बन गया है क्योंकि आम लोगों की आय उस अनुपात में नहीं बढ़ रही है।

  1. सीमित आय : वर्तमान में भारत में एक औसत व्यक्ति की मासिक कमाई महज 15,000 से 20,000 रुपए के बीच बनी हुई है।
  2. बढ़ता खर्च : इस सीमित आय में घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई, दवाई और अब महंगी होती जा रही खाद्य सामग्री को संभालना नामुमकिन होता जा रहा है।

देश में आर्थिक असमानता और जमीनी हकीकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी देश की एक बहुत बड़ी आबादी बुनियादी भोजन के लिए सरकारी मदद पर निर्भर है। सरकार वर्तमान में देश के 81 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध करा रही है, जो यह दर्शाता है कि महंगाई के इस दौर में एक बड़ा वर्ग अपने दम पर दो वक्त की रोटी जुटाने में भी असमर्थ महसूस कर रहा है।

अगर रुपए का अवमूल्यन इसी तरह होता रहा तो महंगाई बढ़ेगी ही। महंगाई का सबसे पहले असर रसोई पर पड़ता है, वह दिखाई दे रहा है। बीते दस साल मे खाने के तेल के दाम कहां से कहां पहुंच गए। मसाले भी कहां थे और कहां पहुंच गए। सरकार या तो रुपए के अवमूल्यन को रोके अन्यथा जनता महंगाई के लिए तैयार रहे। महंगाई बढऩे से सबसे ज्यादा तकलीफ होती है मिडिल क्लास को।

  • Babulal Gupta, Chairman, Rajasthan Khadya Padarth Vyapar Sangh

देश में महंगाई अंतरराष्ट्रीय कारणों के कारण बढ़ रही है। हम बहुत सी चीजों में Price Maker व Price Taker नहीं हैं। विदेशी तेल भारत में बड़ी मात्रा में आ रहे हैं, जिनका Price काफी बढ़ गया है। पहले जो Freight 25 Dollar था वह अब बढक़र 1800 Dollar पहुंच गया है। दूसरा रुपया कमजोर हुआ है तो उससे भी महंगाई की मार बढ़ी है। दूसरी अभी युद्ध के चलते हालात बिगड़े हुए हैं।

  • Manoj Murarka, अध्यक्ष, National Oil and Trade Association


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