Friday, August 14, 2026 |
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डॉलर के मुकाबले मजबूत हो सकता है रुपया, वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में बढ़त की संभावना: रिपोर्ट

by Business Remedies
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Indian Rupee Expected To Appreciate Against Dollar In H1 FY27 Amid Improving Foreign Investment Flows

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और भारतीय रिजर्व बैंक तथा केंद्र सरकार की हालिया नीतिगत पहलों के चलते भारतीय रुपये पर निकट अवधि का दबाव घटा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हो सकता है। एलारा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू खाते पर दबाव कम होने और विदेशी पूंजी प्रवाह में सुधार के कारण रुपये को समर्थन मिल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक रुपया 93 से 95 के दायरे में उतार-चढ़ाव करता रह सकता है, लेकिन समग्र रूप से इसमें मजबूती की संभावना दिखाई दे रही है।

हालांकि, यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में वृद्धि करता है, तो उभरते बाजारों की मुद्राओं पर फिर से दबाव बन सकता है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व 50 आधार अंकों की ब्याज दर वृद्धि कर सकता है। ऐसी स्थिति में भारतीय रुपये सहित अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं की मजबूती सीमित रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों ने विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकारी बॉन्ड से जुड़े कर नियमों में दी गई राहत और विदेशी मुद्रा आधारित ऋण निवेश को आकर्षित करने के लिए दी गई प्रोत्साहन योजनाओं ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है।

5 जून 2026 को लागू किए गए ऐतिहासिक आयकर अध्यादेश के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए भारत के सरकारी बॉन्ड निवेश को कर-मुक्त कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप भारतीय ऋण बाजार में विदेशी निवेश का प्रवाह दोबारा बढ़ा है और बॉन्ड प्रतिफल में भी नरमी देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक की नीति घोषणा के बाद केवल 10 कारोबारी दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने विशेष मार्ग के माध्यम से भारतीय ऋण बाजार में लगभग 1.7अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया। इसके विपरीत, नीति घोषणा से पहले के 10 कारोबारी दिनों में यह निवेश केवल 22.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर था।

इसके अलावा, यदि भारत को Global Bloomberg Bond Index में शामिल किया जाता है, तो भारत में कुल विदेशी निवेश प्रवाह80अरब अमेरिकी डॉलर से 85अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे रुपये को अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है और विदेशी मुद्रा भंडार में भी वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 के दौरान चालू खाते के वित्तपोषण से जुड़े जोखिम काफी हद तक कम होते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, वित्त वर्ष 2028 के लिए विदेशी पूंजी प्रवाह की स्थिरता को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं।

वैश्विक स्तर पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अवसर सीमित होते जा रहे हैं और अमेरिका में मौद्रिक नीति लगातार सख्त हो रही है। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े निवेश का बड़ा हिस्सा अमेरिका की ओर केंद्रित हो रहा है। ऐसे में भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का प्रवाह अपेक्षाकृत कमजोर रह सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी बाजारों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निवेश की बढ़ती हिस्सेदारी और संभावित ब्याज दर वृद्धि के कारण भारतीय शेयरों में विदेशी निवेशकों की रुचि पर दबाव बना रह सकता है।

एलारा सिक्योरिटीज ने अनुमान लगाया है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर 2026, दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 में 25-25 आधार अंकों की तीन अलग-अलग ब्याज दर बढ़ोतरी कर सकता है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और भारतीय रुपये की तेजी पर भी कुछ हद तक असर पड़ सकता है। फिलहाल, घरेलू आर्थिक संकेतक, नीतिगत समर्थन और विदेशी निवेश में सुधार रुपये के लिए सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। इसलिए वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में भारतीय मुद्रा के प्रदर्शन पर निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की नजर बनी रहेगी।



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