Sunday, June 28, 2026 |
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भारत के सीमेंट क्षेत्र में क्षमता विस्तार रिकॉर्ड स्तर पर, उपयोग दर 70-71 प्रतिशत रहने की संभावना

by Business Remedies
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India Cement Industry Capacity Expansion And Stable Utilisation Outlook For FY27

भारत के सीमेंट क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की रफ्तार लगातार तेज बनी हुई है। इसके बावजूद वित्त वर्ष 2027 में उद्योग की क्षमता उपयोग दर लगभग 70-71 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, मांग में निरंतर वृद्धि के साथ-साथ नई उत्पादन इकाइयों के जुड़ने से पूरे क्षेत्र में उपयोग स्तर व्यापक रूप से संतुलित बना रहेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में सीमेंट उद्योग की वृद्धि दर लगभग 6.5-7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2027 में मांग में करीब 5 प्रतिशत वृद्धि होने की संभावना है। हालांकि, उत्पादन क्षमता बढ़ाने की गति भी तेज बनी रहेगी, जिसके कारण उपयोग दर में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। क्षेत्रीय स्तर पर देखा जाए तो उत्तर और मध्य भारत में क्षमता उपयोग अपेक्षाकृत अधिक रहने की उम्मीद है। वहीं दक्षिण भारत में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता उपलब्ध होने के कारण उपयोग स्तर अपेक्षाकृत कम रह सकता है।

उद्योग में वित्त वर्ष 2027 के दौरान 42-44 मिलियन टन प्रतिवर्ष नई क्षमता जोड़े जाने का अनुमान है। इससे पहले वित्त वर्ष 2026 में 50-55 मिलियन टन प्रतिवर्ष नई क्षमता जोड़ी गई थी। यह दर्शाता है कि देश की प्रमुख सीमेंट कंपनियां भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे वर्ष के दौरान सीमेंट की मांग मजबूत बनी रही। विशेष रूप से मानसून के बाद निर्माण गतिविधियों में तेज़ी आने से मांग को अच्छा समर्थन मिला। आवास और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में लगातार बढ़ती गतिविधियों ने भी उद्योग को मजबूती प्रदान की। तेजी से हो रहे शहरीकरण, आवास की बढ़ती आवश्यकता और सरकार द्वारा सड़कों, मेट्रो रेल परियोजनाओं, औद्योगिक गलियारों, बंदरगाहों तथा अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किए जा रहे निवेश से सीमेंट क्षेत्र को लगातार लाभ मिल रहा है। देश की प्रमुख सीमेंट निर्माता कंपनियां जैविक और अधिग्रहण आधारित दोनों माध्यमों से अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं। उनका लक्ष्य आने वाले वर्षों में बढ़ने वाली मांग का लाभ उठाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उद्योग ऐसे चरण में प्रवेश कर सकता है, जहां परिचालन दक्षता, क्षमता उपयोग में सुधार और बेहतर प्रतिफल दरें कंपनियों के बीच मुख्य अंतर पैदा करेंगी। नई उत्पादन क्षमताओं के शुरू होने के बाद कंपनियां मौजूदा परिसंपत्तियों का अधिकतम उपयोग करने और हाल ही में शुरू की गई इकाइयों से बेहतर उत्पादकता हासिल करने पर अधिक ध्यान दे सकती हैं। दीर्घकालिक दृष्टि से सीमेंट क्षेत्र की संभावनाएं काफी मजबूत बनी हुई हैं। बुनियादी ढांचा खर्च में वृद्धि, किफायती आवास योजनाएं, विनिर्माण क्षेत्र में निवेश, स्मार्ट सिटी परियोजनाएं तथा राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन जैसी पहलों से उद्योग को आने वाले वर्षों में निरंतर समर्थन मिलने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत में प्रति व्यक्ति सीमेंट खपत अभी भी वैश्विक औसत से काफी कम है। यही कारण है कि देश में सीमेंट उद्योग के लिए दीर्घकालिक वृद्धि की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, निकट भविष्य में उत्पादन क्षमता में लगातार बढ़ोतरी के बीच उपयोग दर स्थिर रह सकती है। ऐसे माहौल में परिचालन दक्षता, लागत नियंत्रण और परिसंपत्तियों की उत्पादकता ही कंपनियों की सफलता के प्रमुख आधार बनेंगे।



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