मुंबई,
अगले सप्ताह Stock Market में भारतीय शेयर बाजार की चाल मुख्य रूप से वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहने की संभावना है। निवेशकों की नजर US Fed की मौद्रिक नीति बैठक, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की प्रगति तथा कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव पर रहेगी। इन सभी घटनाक्रमों का असर घरेलू बाजार की दिशा और निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने लगातार दो सप्ताह की गिरावट के बाद मजबूत वापसी दर्ज की। बेहतर निवेशक विश्वास और वैश्विक संकेतों में सुधार के कारण प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त देखने को मिली। Nifty में 1.10 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई और यह 23,622.90 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि Sensex 1.73 प्रतिशत बढ़कर 75,527.95 के स्तर पर पहुंच गया।
वैश्विक बाजारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम US Fed की Federal Open Market Committee (FOMC) की बैठक होगी, जो Date : 16-17 जून को आयोजित की जाएगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में ब्याज दरों में किसी बदलाव की संभावना कम है। हालांकि निवेशकों की नजर US Fed की टिप्पणी पर रहेगी, जिसमें महंगाई, आर्थिक वृद्धि और भविष्य में ब्याज दरों की दिशा को लेकर संकेत मिल सकते हैं। यदि US Fed आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती के संकेत देता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव भारत सहित उभरते बाजारों में विदेशी निवेश पर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी अगले सप्ताह बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। निवेशकों की उम्मीदों को उस समय बल मिला जब अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान के साथ क्षेत्रीय संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से तैयार किया गया शांति समझौता Date : 14 जून को हस्ताक्षरित किया जा सकता है। यदि इस समझौते में प्रगति होती है तो इसका सकारात्मक असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और निवेशकों के विश्वास पर देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण Hormuz Strait के सामान्य रूप से खुलने की संभावना भी बाजार के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया भर में बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। यदि इस मार्ग पर किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आता और क्षेत्रीय स्थिति स्थिर बनी रहती है, तो वैश्विक शेयर बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति मजबूत हो सकती है।
कच्चे तेल की कीमतें भी अगले सप्ताह निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में शामिल रहेंगी। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतें ईरान संघर्ष की शुरुआती अवधि के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। इसकी प्रमुख वजह Hormuz Strait के माध्यम से तेल आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद और अस्थायी शांति व्यवस्था को लेकर बढ़ा भरोसा है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है तो भारत में महंगाई पर दबाव कम होगा, आयात व्यय घटेगा और अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी। इस बीच निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए घोषित हालिया उपायों के प्रभाव का भी आकलन करेंगे। केंद्रीय बैंक ने पात्र बाहरी वाणिज्यिक उधार और नए विदेशी मुद्रा सावधि जमा के लिए विदेशी मुद्रा विनिमय सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस कदम से वित्तीय प्रणाली में तरलता बेहतर होने, विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलने और बाजार की धारणा मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

