अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो अभी भारत के दौरे पर हैं। उन्होंने गत दिनों ही भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ व्यापार समझौते को लेकर विस्तृत चर्चा की है। यह समझौता आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होगा। इस चर्चा में मुख्य रूप से भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी किया जाना शामिल है। इसके बदले में भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, विमान और तकनीक सहित 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदेगा। अगर यह डील भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्रों को इस डील में पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। इस समझौते में मुख्य रूप से भारत की ओर से अमेरिका को कपड़ा, लेदर फुटवेयर, रसायन, होम डेकोर, जेम्स एंड ज्वेलरी और समुद्री उत्पाद निर्यात किया जाएगा। इसके अलावा भारत द्वारा अमेरिका से विमान और उनके पार्ट्स, ऊर्जा उत्पाद, लिक्विफाइड नेचुरल गैस, कीमती धातुएं और कोयला आयात किया जाएगा। भारत दुनिया का बड़ा जेनेरिक दवा सप्लायर है, इसलिए अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच भारत के लिए बड़ा अवसर हो सकती है। वहीं टैरिफ कम होने से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों की लागत घटेगी और वे अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। तीस ट्रिलियन डॉलर के विशाल अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों की सीधी पहुंच होगी, जिससे छोटे उद्योगों और रोजगार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। भारत के किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों की पूरी रक्षा की गई है, गेहूं, चावल, दूध, पनीर जैसे अमेरिकी उत्पादों पर कोई कर रियायत नहीं दी गई है। व्यापार समझौता एक अंतरिम रूपरेखा के रूप में काम कर रहा है। इसे विस्तृत और पूरी तरह से अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल लगातार काम कर रहे हैं। जल्द ही ट्रेड डील को अंतिम रूप दिया जाएगा। इससे दोनों देश आर्थिक सहयोग को नए स्तर तक ले जा सकते हैं।

