नई दिल्ली,
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल 27 April को निर्यात प्रोत्साहन परिषदों और उद्योग संगठनों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत के निर्यात को बढ़ाने के लिए नई रणनीतियों पर चर्चा करना है, क्योंकि हाल के समय में निर्यात में गिरावट और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों ने स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव, जिसमें अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच टकराव शामिल है, ने व्यापार मार्गों को प्रभावित किया है। इस कारण कई शिपिंग कंपनियां मध्य पूर्व के कुछ क्षेत्रों में संचालन करने से हिचक रही हैं। यह क्षेत्र भारत के लिए एक प्रमुख निर्यात गंतव्य रहा है, जिससे भारतीय निर्यातकों पर सीधा असर पड़ा है।
भारत-न्यूज़ीलैंड समझौते के बीच बढ़ेगा व्यापार सहयोग
यह बैठक उस समय हो रही है जब भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। यह समझौता भारत मंडपम में संपन्न होगा। न्यूज़ीलैंड के प्रतिनिधि टॉड मैक्ले पहले से ही भारत में मौजूद हैं और वे भारतीय उद्योग जगत के नेताओं के साथ चर्चा कर रहे हैं। बैठक से पहले पियूष गोयल आगरा में भारतीय और न्यूज़ीलैंड के व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार नए बाजारों की तलाश और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय है। 27 April को होने वाली इस बैठक में चमड़ा, औषधि, वाहन, खेल सामग्री और इंजीनियरिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इन क्षेत्रों के निर्यात पर हालिया वैश्विक परिस्थितियों का असर पड़ा है।
निर्यात में गिरावट से बढ़ी चिंता
हाल के आंकड़ों के अनुसार, March महीने में भारत का वस्तु निर्यात 7.44 प्रतिशत घटकर 38.92 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले पांच महीनों में सबसे बड़ी गिरावट है। यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक व्यापार अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण हुई है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया को होने वाले निर्यात में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय है।
आयात में भी कमी, व्यापार घाटा घटा
March में आयात भी 6.51 प्रतिशत घटकर 59.59 अरब डॉलर रह गया। इसका मुख्य कारण कच्चे तेल और सोने के आयात में कमी रहा। इसके चलते व्यापार घाटा घटकर 20.67 अरब डॉलर पर आ गया, जो पिछले नौ महीनों का सबसे निचला स्तर है। हालांकि, व्यापक स्तर पर स्थिति अभी भी चिंता जनक बनी हुई है। मध्य पूर्व देशों को भारत का निर्यात लगभग 58 प्रतिशत घट गया है, जबकि खाड़ी देशों से आयात में भी 51 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
पूरे वित्त वर्ष में मिश्रित प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का कुल वस्तु निर्यात 0.93 प्रतिशत की मामूली वृद्धि के साथ 441.78 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा। वहीं, आयात 7.45 प्रतिशत बढ़कर 775 अरब डॉलर हो गया, जिससे व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसका मुख्य कारण सोने और चांदी के आयात में तेज वृद्धि रहा। अगर वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर देखा जाए, तो कुल निर्यात 4.22 प्रतिशत बढ़कर 860.09 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।

