New Delhi,
आने वाले सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण वैश्विक और घरेलू संकेतों पर निर्भर रहने वाली है। निवेशकों की नजर खास तौर पर US-Iran के बीच चल रही शांति वार्ता, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों के रुझान और कंपनियों के Q4 FY26 के नतीजों पर बनी हुई है।
विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, बेहतर वैश्विक संकेत और पूंजी प्रवाह में स्थिरता से बाजार को इस समय सहारा मिल रहा है। हालांकि, बाजार में एक मजबूत और टिकाऊ तेजी के लिए लगातार खरीदारी का बने रहना जरूरी है। मध्य पूर्व में तनाव कम होने से बाजार को सहारा मिला है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार अभी भी बाजार बाहरी कारकों पर काफी हद तक निर्भर है। निकट अवधि में गिरावट का जोखिम सीमित दिखाई दे रहा है, जबकि धीरे-धीरे तेजी की गति बन रही है। यह संकेत देता है कि बाजार रिकवरी से स्थिर स्थिति की ओर बढ़ रहा है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है या और गिरावट आती है, तो इससे शेयर बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है और व्यापक आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है।
पिछले सप्ताह बाजार ने सकारात्मक प्रदर्शन किया और लगातार दूसरे सप्ताह तेजी के साथ बंद हुआ। वैश्विक माहौल में सुधार और US-Iran समझौते की उम्मीद ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया। साथ ही, घरेलू आर्थिक स्थिति भी स्थिर बनी रही, जिससे बाजार को गति मिली। सप्ताह के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन कुल मिलाकर रुझान ऊपर की ओर रहा। बड़े सूचकांकों के मुकाबले व्यापक बाजार ने बेहतर प्रदर्शन किया। stock market update के अनुसार, Nifty और Sensex दोनों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज हुई और ये क्रमशः 24,353 और 78,493 के स्तर पर बंद हुए।
Hormuz जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में आई अस्थायी राहत से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई थी, जो पहले 86 डॉलर के आसपास पहुंची और बाद में 92-93 डॉलर के दायरे में स्थिर हो गई। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सप्ताह के अंतिम तीन सत्रों में शुद्ध खरीदारी की, जिससे बाजार में स्थिरता के संकेत मिले। हालांकि, पूरे सप्ताह के आधार पर उनका निवेश लगभग 250 करोड़ रुपये की मामूली निकासी के साथ नकारात्मक रहा। इससे निवेशक अभी भी लगातार निवेश प्रवाह का इंतजार कर रहे हैं।
वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने जो पहले बाजार को सहारा दे रहे थे, सप्ताह के अंतिम सत्रों में मुनाफावसूली करते हुए शुद्ध बिकवाली की। साप्ताहिक आधार पर उनकी निकासी लगभग 6,300 करोड़ रुपये रही। तकनीकी दृष्टि से Nifty फिलहाल 24,100 से 24,400 के दायरे में चल रहा है। 24,400 के आसपास प्रतिरोध और 24,000 के पास समर्थन देखा जा रहा है। यदि यह स्तर मजबूती से पार होता है, तो आगे 24,800 से 25,000 तक तेजी संभव है। Bank Nifty के लिए 56,800 से 57,000 का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध बना हुआ है। इस स्तर के ऊपर टिकने पर सूचकांक 57,500 से 58,000 तक जा सकता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशकों को मजबूत आधार वाली बड़ी कंपनियों में निवेश बनाए रखना चाहिए और साथ ही चुनिंदा अवसरों में भागीदारी करनी चाहिए। क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो ऊर्जा और धातु तथा खनन क्षेत्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में समय-समय पर तेजी देखने को मिल सकती है। आर्थिक आंकड़ों के मोर्चे पर 20 April को मार्च महीने के बुनियादी ढांचा उत्पादन के आंकड़े जारी होंगे। इसके बाद 23 April को विनिर्माण, सेवा और संयुक्त PMI आंकड़े सामने आएंगे, जो अर्थव्यवस्था की गति के बारे में महत्वपूर्ण संकेत देंगे।

