Wednesday, September 9, 2026 |
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तनाव के कारण जेनेरिक दवाईयों की लागत में होती बढ़ोतरी

by Business Remedies
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ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत के कई उद्योगों पर असर पड़ा है। चाहे वह प्लास्टिक हो, ज्वैलरी हो या फिर तेल इंडस्ट्री हो। इसके अलावा आम लोगों की जीवन रक्षक दवाईयों यानि भारतीय फार्मा उद्योग पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। इससे करीब ढाई हजार से पांच हजार करोड़ रुपए का निर्यात नुकसान और आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर बाधा का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण से पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते माल ढुलाई भी महंगी हो गई है और जेनेरिक दवाओं की लागत में पच्चीस फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है। जहां कच्चे माल की कीमतें 30-70 फीसदी तक बढ़ गई हैं। युद्ध के कारण केमिकल्स की सप्लाई चेन बाधित है। एमएसएमई दवा निर्माताओं पर सबसे ज्यादा दबाव बढ़ा है। भारत खाड़ी देशों को बड़ी मात्रा में दवाएं भेजता है। अगर यही हाल रहा तो सप्लाई और सरकारी टेंडर का संकट आने वाले दिनों में अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग को होने वाली दवा आपूर्ति में भी देखने को मिल सकता है। सरकारी जेनरिक दवा आपूर्ति का करीब 90 फीसदी हिस्सा एमएसएमई दवा इकाईयों से जाता है। अगर राहत नहीं मिली तो 2-3 महीने में बड़ी संख्या में इकाईयां बंद हो सकती हैं। वहीं शिपमेंट रुकने से फार्मा निर्यात पर काफी असर पड़ा है। हवाई और समुद्री मार्ग बाधित होने से भाड़ा दोगुना हो गया है, जिससे दवाओं की उत्पादन लागत बढ़ गई है। कैंसर जैसी बीमारियों की तापमान-संवेदनशील दवाओं की आपूर्ति में देरी की बनी हुई है। तनाव के कारण फार्मा सेक्टर के शेयरों में भी 5 फीसदी से अधिक की गिरावट देखने में आई है।



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