Tuesday, September 29, 2026 |
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वैश्विक अस्थिरता के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, GDP Growth 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान : Morgan Stanley

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)। वैश्विक अस्थिरता के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और जीडीपी ग्रोथ वित्त वर्ष 27 में 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई। मॉर्गन स्टेनली द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में ग्रोथ जारी रहेगी।

हालांकि, ऊर्जा की लागत, आपूर्ति को लेकर व्यवधान और बाहरी दबाव नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि यह पहले के 6.5 प्रतिशत के अनुमान से कम है। इस गिरावट का कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं, जिनके औसतन लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा आयात की बढ़ती कीमतों से व्यवसायों के उत्पादन खर्च बढ़ रहे हैं और महंगाई बढ़ रही है, साथ ही भारतीय रुपए पर भी दबाव पड़ रहा है। अल्पकालिक आर्थिक विकास में और गिरावट आने की आशंका है, जो जून 2026 की तिमाही में सालाना आधार पर 5.9 प्रतिशत के निचले स्तर तक पहुंच सकता है। इस मंदी का मुख्य कारण औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती, वित्तीय स्थितियों में सख्ती और लाभ मार्जिन में कमी आना है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति की स्थिति में सुधार और सरकारी सहायता उपायों के प्रभावी होने से विकास में धीरे-धीरे सुधार हो सकता है। कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी के कारण महंगाई में भी वृद्धि की आशंका है, वित्त वर्ष 2027 में औसत खुदरा महंगाई दर 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च इनपुट लागत, मुद्रा की कमजोरी और खाद्य एवं वस्तुओं की स्थिर कीमतों के कारण मुद्रास्फीति उच्च स्तर पर बनी रहने की संभावना है। अगर तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चढ़ती हैं, तो खुदरा ईंधन की कीमतों में संभावित वृद्धि और व्यापक मुद्रास्फीति प्रभावों सहित और भी दबाव बढ़ सकता है।

भारत की बाहरी स्थिति पर भी दबाव पडऩे की संभावना है। चालू खाता घाटा पहले के लगभग 1 प्रतिशत की तुलना में बढक़र सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 प्रतिशत होने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण तेल आयात बिलों में वृद्धि है। रिपोर्ट में बताया गया कि पूंजी प्रवाह में कमी के कारण भुगतान संतुलन लगातार तीसरे वर्ष घाटे में रह सकता है, जिससे रुपए पर दबाव बढ़ेगा।
स्थिति को संभालने के लिए, नीति निर्माताओं द्वारा शुरू में राजकोषीय उपायों, जैसे कि उच्च सब्सिडी और लागत नियंत्रण उपायों पर निर्भर रहने की उम्मीद है, जिससे राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 4.3 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।



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