Monday, June 29, 2026 |
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भारतीय मुद्रा में मजबूती, आरबीआई के कदमों से मिला सहारा

by Business Remedies
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Indian currency and exchange rate performance against the dollar

New Delhi,

भारतीय मुद्रा ने सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ शुरुआत की और लगभग 1.3 प्रतिशत बढ़कर 93.59 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। यह बढ़त भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार में लगाए गए नए प्रतिबंधों के बाद देखने को मिली है।

आरबीआई के सख्त निर्देशों का असर

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये में अपनी खुली स्थिति को 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक सीमित रखें। इस कदम का उद्देश्य सट्टेबाजी पर रोक लगाना और रुपये में गिरावट को नियंत्रित करना है। केंद्रीय बैंक ने अधिकृत डीलर के रूप में कार्य करने वाले बैंकों को भी दिन के अंत तक अपनी स्थिति इसी सीमा में रखने का आदेश दिया है। साथ ही, वाणिज्यिक बैंकों को यह सीमा 10 अप्रैल तक लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। आरबीआई ने यह भी संकेत दिया है कि बाजार की स्थिति के अनुसार इन सीमाओं में बदलाव किया जा सकता है। अनुमानों के अनुसार, पहले यह खुली स्थिति लगभग 2,500 करोड़ डॉलर से लेकर 5,000 करोड़ डॉलर से अधिक तक थी, जिस पर अब नियंत्रण लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

मार्च में भारी गिरावट का दबाव

मार्च महीने के दौरान भू-राजनीतिक तनाव के चलते भारतीय मुद्रा में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। पिछले शुक्रवार को भी यह लगभग 1 प्रतिशत कमजोर होकर 94.8125 के स्तर तक पहुंच गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक ऊंची कच्चे तेल की कीमतें भारतीय मुद्रा और समग्र आर्थिक स्थिति पर दबाव बना रही हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। ब्रेंट कच्चा तेल बढ़कर लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इस स्थिति के कारण भारत की पहले की मजबूत आर्थिक स्थिति, जिसमें उच्च विकास, कम मुद्रास्फीति और संतुलित घाटा शामिल था, अब कमजोर होती नजर आ रही है।

आर्थिक संकेतकों पर बढ़ता दबाव

विशेषज्ञों के अनुसार, अब देश को कम जीडीपी विकास, अधिक महंगाई, बढ़ते वित्तीय और चालू खाता घाटे तथा आय में धीमी वृद्धि जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, stock market update के अनुसार इन जोखिमों का असर पहले ही बाजार में दिखाई देने लगा है। nifty का मूल्यांकन अनुपात घटकर लगभग 19.9 गुना रह गया है, जिसे विशेषज्ञ उचित मानते हैं, लेकिन अभी सस्ता नहीं मानते। विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई द्वारा खुली स्थिति पर सीमा लगाने से निकट अवधि में भारतीय मुद्रा को सहारा मिल सकता है। बड़े पैमाने पर डॉलर की स्थिति कम होने से रुपये में मजबूती आ सकती है। फिर भी, डॉलर की लगातार मांग और ऊर्जा कीमतों से जुड़ी महंगाई का खतरा अभी भी बना हुआ है। जब तक कच्चे तेल की कीमतों में ठोस गिरावट नहीं होती, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है।



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