बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। भारत के तेजी से बढ़ते solar export को बड़ा झटका लगा है। United States ने भारतीय solar cell और module पर भारी countervailing duty लगा दी है। इससे India की export आधारित solar कंपनियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। हालांकि इस फैसले से domestic market में solar products की availability बढ़ने और कीमतों में competition बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। United States द्वारा लगाए गए भारी tariff से भारतीय solar export पर दबाव बढ़ेगा और United States market में India की हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। हालांकि यह स्थिति भारतीय कंपनियों को नए market तलाशने और domestic solar industry को मजबूत करने के लिए प्रेरित भी कर सकती है।
अमेरिका ने बढ़ाया टैरिफ
United States Department of Commerce ने India से import होने वाले crystalline silicon photovoltaic solar cell और module पर लगभग 126 प्रतिशत तक की प्रारंभिक countervailing duty लगाने की घोषणा की है। United States प्रशासन का आरोप है कि भारतीय solar कंपनियों को सरकार से मिलने वाली subsidy के कारण उनके products United States कंपनियों की तुलना में सस्ते पड़ते हैं, जिससे competition प्रभावित होता है। यह duty फिलहाल प्रारंभिक है और इसकी अंतिम समीक्षा जुलाई 2026 तक होने की संभावना है। इसके साथ ही United States भारतीय solar products पर anti-dumping investigation भी कर रहा है, जिससे कुल tariff और बढ़ सकता है।
भारत के निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिका को
भारतीय solar industry लंबे समय से United States market पर निर्भर रही है। अनुमान है कि India के 95 से 98 प्रतिशत तक solar module export United States को ही होते हैं। ऐसे में भारी tariff लगने से भारतीय कंपनियों के लिए United States market लगभग अव्यावहारिक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नए tariff के बाद भारतीय solar products United States products की तुलना में कम से कम 30 प्रतिशत तक महंगे हो सकते हैं, जिससे competition और कठिन हो जाएगा।
कंपनियां नए बाजारों की तलाश में
United States market में अनिश्चितता बढ़ने के बाद भारतीय solar कंपनियां अब Europe, Middle East, Africa और Latin America जैसे नए markets पर ध्यान देने लगी हैं। कई कंपनियां विदेशों में manufacturing units स्थापित करने और domestic demand पर अधिक focus करने की रणनीति बना रही हैं।
घरेलू बाजार को मिल सकती है राहत
India में solar module manufacturing capacity तेजी से बढ़ रही है। देश की production capacity 140 gigawatt से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि domestic demand लगभग 40-45 gigawatt के आसपास है। ऐसे में export घटने पर अतिरिक्त production का एक हिस्सा domestic market में आ सकता है। इसके अलावा solar panels की कीमतों में competition बढ़ सकता है। बड़े solar projects की लागत कम हो सकती है और domestic solar installation को बढ़ावा मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय सोलर बाजार में भारत को झटका
India ने हाल के वर्षों में solar manufacturing capacity तेजी से बढ़ाई है और global market में अपनी मजबूत उपस्थिति बनानी शुरू की थी, लेकिन United States tariff से India के international solar trade को अल्पकालिक झटका लग सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि United States में tariff लंबे समय तक बने रहते हैं तो भारतीय कंपनियों को market diversification, domestic demand बढ़ाने और नई supply chain strategy अपनानी पड़ेगी।
निर्यात से जुड़े प्रमुख आंकड़े
2024 में United States ने India से करीब 792.6 million dollar के solar products import किए।
2022 में यह आंकड़ा लगभग 83.8 million dollar था, यानी दो साल में लगभग 9 गुना वृद्धि हुई।
2025 में India से United States को solar module export का मूल्य लगभग 1.24 billion dollar रहा।
अप्रैल 2023 से नवंबर 2025 के बीच India ने United States को लगभग 34,000 हजार करोड़ (340 अरब रुपए) के solar cell और module export किए।
टैरिफ बढ़ने की वजह से Indian module manufacturers जो out of India supply करते थे, अब उनके रास्ते बंद होंगे। ऐसे में वे नए markets का रुख करेंगे। साथ ही उन्हें अपना माल regional market में खपाना होगा। ऐसे स्थिति में उम्मीद की जा रही है कि module की कीमतों में कमी आनी चाहिए।
- Nitin Agarwal, CEO, Rajasthan Solar Association

