बेंगलुरु,
एशिया प्रशांत क्षेत्र में वर्ष 2025 के दौरान दफ्तर स्थान की मांग में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें अकेले भारत ने कुल लीजिंग का लगभग 68 प्रतिशत और नई आपूर्ति का 55 प्रतिशत हिस्सा अपने नाम किया। यह जानकारी रियल एस्टेट परामर्श कंपनी कोलियर्स की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में एशिया प्रशांत के 11 प्रमुख दफ्तर बाजारों में कुल दफ्तर लीजिंग 98 लाख वर्ग मीटर (लगभग 10.55 करोड़ वर्ग फुट) तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि का मुख्य आधार प्रमुख बाजारों, विशेष रूप से भारत, मुख्यभूमि चीन और जापान में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेड ए दफ्तर स्थान की मजबूत मांग रही। वर्ष 2025 के दौरान इन 11 बाजारों में नई आपूर्ति भी 19 प्रतिशत बढ़कर 96 लाख वर्ग मीटर (करीब 10.33 करोड़ वर्ग फुट) हो गई। आपूर्ति में यह बढ़ोतरी मांग के रुझान के अनुरूप रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि 11 में से 8 बाजारों में नई आपूर्ति बढ़ी, जिसमें भारत, मुख्यभूमि चीन और सिंगापुर ने मिलकर कुल आपूर्ति का 82 प्रतिशत योगदान दिया।
कोलियर्स इंडिया के प्रबंध निदेशक अर्पित मेहरोत्रा ने कहा कि वर्ष 2026 में भी मांग और आपूर्ति दोनों मजबूत बने रहने की उम्मीद है। स्थिर विस्तार योजनाओं और उच्च गुणवत्ता वाले, भविष्य के अनुरूप कार्यस्थलों की बढ़ती प्राथमिकता से दफ्तर बाजार को सहारा मिलेगा। उन्होंने बताया कि खाली दफ्तर स्थान में और कमी आ सकती है, जिससे प्रमुख बाजारों, विशेष रूप से भारत में किराये पर ऊपर की ओर दबाव बनेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत एशिया प्रशांत दफ्तर बाजार में लगातार अग्रणी भूमिका निभा रहा है और निवेश के लिए प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है। स्थिर आर्थिक वृद्धि, मजबूत कॉरपोरेट उपस्थिति और तेजी से बढ़ते वैश्विक क्षमता केंद्रों के कारण भारत का दफ्तर बाजार आगे भी अपनी वृद्धि की गति बनाए रखने की स्थिति में है।
कोलियर्स इंडिया के राष्ट्रीय निदेशक और शोध प्रमुख विमल नाडर ने कहा कि आने वाले समय में निरंतर मांग और संस्थागत निवेशकों की रुचि से दफ्तर स्थान का मजबूत अवशोषण जारी रहेगा और भारत दीर्घकालिक दफ्तर निवेश के लिए पसंदीदा गंतव्य बना रहेगा। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2026 में एशिया प्रशांत का दफ्तर बाजार एक नए चरण में प्रवेश करेगा, जहां केवल विस्तार का आकार नहीं बल्कि रणनीति अधिक महत्वपूर्ण होगी। अब कंपनियां कितना स्थान ले रही हैं, इससे अधिक यह महत्वपूर्ण होगा कि वे कहां, क्यों और किस प्रकार का दफ्तर स्थान चुन रही हैं।

