अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय ज्वैलरी व्यवसाय पर लगाए गए पचास फीसदी टैरिफ से निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पडऩे की उम्मीद है। इससे निर्यात की लागत बढ़ेगी, लाभ मार्जिन कम होगा और छोटे कारीगरों के लिए रोजगार का संकट उत्पन्न हो जाएगा। अमेरिकी बाजार भारतीय ज्वैलरी के लिए एक बड़ा बाजार है और टैरिफ के कारण निर्यात में 30 फीसदी तक की कमी आ जाएगी। ज्वैलरी उद्योग में काम करने वाले लाखों लोगों के लिए यह टैरिफ जॉब लॉस का कारण बन जाएगा। टैरिफ के कारण भारतीय ज्वैलरी की कीमतें बढ़ जाएंगी, जिससे अन्य देशों के ज्वैलरी निर्यातकों को फायदा होगा। ज्वैलरी उद्योग ने सरकार से भी सहायता की मांग की है, जिसमें टैरिफ की दरों में कमी और निर्यात प्रोत्साहन शामिल हैं। जहां पचास फीसदी तक के टैरिफ से भारतीय हीरे, सोने और कीमती पत्थरों के आभूषण अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। इससे अमेरिका को होने वाले निर्यात में भारी गिरावट आ सकती है। रत्न और आभूषण निर्यात में 85फीसदी से अधिक मध्यम और छोटे पैमाने के उद्यम शामिल हैं, जो इस तरह के भारी शुल्क का बोझ सहने में असमर्थ हैं। इससे सूरत, मुंबई और जयपुर जैसे केंद्रों में कारीगरों की नौकरी पर संकट आ सकता है। तुर्की, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देश, जिन पर कम टैरिफ लगता है, उनके मुकाबले भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में कम प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। इस कारण भारतीय निर्यातक टैरिफ से बचने के लिए मेक्सिको, कनाडा, तुर्की या यूएई जैसे कम टैरिफ वाले देशों के रास्ते माल भेजने पर विचार कर सकते हैं। जहां एक ओर भारतीय कंपनियां 50 फीसदी टैरिफ को मात देने के लिए स्मार्ट तरीके भी अपना रही है। वे कच्चा माल अमेरिका से भारत लाएं और आभूषण बनाकर वापस भेजें जैसी रणनीति का फायदा उठा रही हैं, जिस पर कम टैरिफ लगता है। हालांकि यह टैरिफ भारतीय ज्वैलरी उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन उद्योग नए बाजारों की खोज और रणनीतिक बदलाव के जरिए इससे निपटने का प्रयास करना भी बेहद जरूरी है, ताकि अमेरिकी टैरिफ के दवाब से कुछ हद तक छुटकारा मिल सके।

