अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इस वर्ष शुरुआत से ही भारत पर अंधाधुंध ट्रैरिफ लगाने का बोझ भारतीय निर्यातक झेल रहे थे। वहीं गत दिनों ही मेक्सिको सरकार द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर 50 फीसदी तक शुल्क लगाने का निर्णय कर फिर से भारतीय निर्यातकों को झटका दिया है। मेक्सिको की संसद ने एक जनवरी-2026 से भारत सहित चीन, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया पर टैरिफ लगाने का फैसला किया है। इन देशों का मेक्सिको से कोई मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) नहीं है। इसके दायरे में एक हजार चार सौ से ज्यादा उत्पाद आ जाएंगे। वैसे मेक्सिको भारत का तीसरा सबसे बड़ा यात्री वाहन निर्यात बाजार है। अब भारत से निर्यात किए जाने वाले यात्री वाहनों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगने से काफी असर पड़ेगा। पहले यह शुल्क 20 प्रतिशत था। इसका सबसे बड़ा असर ऑटोमोबाइल, स्टील, प्लास्टिक, टेक्सटाइल और एल्यूमीनियम जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 50 फीसदी शुल्क लगने से भारतीय निर्यातकों को 1 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
स्टील और एल्यूमीनियम पर 35-40 फीसदी शुल्क लगने से निर्यातकों को 900 मिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। वहीं टेक्सटाइल और फुटवेयर पर 30-35 फीसदी शुल्क लगने से निर्यातकों को करीब 500-600 मिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा ऑटो कंपोनेंट्स पर 25-50 फीसदी शुल्क लगने से निर्यातकों को 600-700 मिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। इसके लिए अभी से ही भारतीय निर्यातकों को अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ानी होगी, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धा कम हो सके। निर्यातकों को नए बाजारों की तलाश करनी पड़ेगी या अपनी उत्पादन रणनीति बदलनी पड़ेगी। इसके अलावा भारत सरकार को मेक्सिको के साथ व्यापार समझौता करने के लिए बातचीत कर इस ओर महत्ती पहल करनी होगी, ताकि भारतीय निर्यातकों को बोझ नहीं झेलना पड़े।

