केंद्र सरकार निरंतर मेक इन इंडिया के विजन को लेकर आगे बढ़ रहा है, जहां पहले रक्षा उपकरणों व सेमीकंडक्टर को लेकर सरकार ने काफी प्रगति की है। आने वाले कुछ ही वर्षों में भारत इन समानों का निर्यात करने लगेगा। अब भारत खिलौना उद्योग में भी निर्भरता कम करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। पिछले दिनों ही मोदी सरकार ने भारत को खिलौनों के निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने का ऐलान कर सभी भारतवासियों को आश्चर्यचकित कर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खिलौना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इससे देश में ना केवल मेक इन इंडिया खिलौनों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि चीन के खिलौना बाजार को भी चुनौती दी जाएगी। भारत के लिए इस समय बड़ा अवसर है। बजट में इस सेक्टर को विशेष प्रोत्साहन देने की योजना भी बनाई गई है, ताकि देश ग्लोबल खिलौना हब बन सके। पिछले कई वर्षों से दुनिया के खिलौना बाजार पर चीन का दबदबा है। भारत का खिलौना निर्यात 2023-24 में केवल 15 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहा है। इस वर्ष बजट में भी भारत में स्वदेशी खिलौनों के उत्पादन को बढ़ाने पर फोकस किया गया। सरकार ने इसके लिए नीति तैयार की है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और स्वदेशी खिलौनों की मांग बढ़े। आने वाले समय में भारत ना केवल अपने घरेलू बाजार में स्वदेशी खिलौनों का वर्चस्व स्थापित करेगा बल्कि वैश्विक बाजार में चीन को भी कड़ी टक्कर देगा। इस कदम से देश में खिलौना उद्योग के विस्तार के साथ लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। मेक इन इंडिया पहल के तहत भारत का खिलौना उद्योग अब दुनिया भर के बाजारों पर कब्जा जमाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

