Thursday, July 23, 2026 |
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Jain International Trade Organisation 2025 में पूज्य दाजी की ‘कॉन्शस लिविंग’ मास्टरक्लास ने बिखेरा आध्यात्मिक प्रकाश

by Business Remedies
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बिजऩेस रेमेडीज/हैदराबाद हैदराबाद के HICC, नोवोटेल में चल रहे तीन-दिवसीय JITO  कनेक्ट 2025 के दौरान, पूज्य दाजी — हार्टफुलनेस के गाइड और श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष — ने अपनी प्रभावशाली मास्टरक्लास ‘कॉन्शस लिविंग’ में ध्यान, स्पष्टता और आंतरिक शक्ति की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस अवसर को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से विभूषित किया। इस सत्र में विश्व-प्रसिद्ध नीति-निर्माता, आध्यात्मिक गुरू, अर्थशास्त्री, कॉर्पोरेट, खेल और सांस्कृतिक जगत की जानी-मानी हस्तियाँ भी सम्मिलित हुईं।
अपने संबोधन में पूज्य दाजी — हार्टफुलनेस के गाइड और श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष — ने जैन धर्म और तीर्थंकरों की महान परंपरा पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा, ‘जैन धर्म सारी भाषाओं की जननी है,’ और यह भी बताया कि ऊर्जा के संचार — अर्थात प्राणाहुति — की अवधारणा सबसे पहले भगवान ऋषभदेव जी ने दी थी। प्राणाहुति की इस विशेष तकनीक, जो हार्टफुलनेस ध्यान पद्धति का मूल है, पर दाजी ने कहा कि हार्टफुलनेस हमें सिखाता है कि आध्यात्मिक जीवन को कभी भी नजऱअंदाज़ नहीं करना चाहिए। दिन भर में हमारा भीतरी प्रवाह (अंडरकरंट) आध्यात्मिकता का होना चाहिए, लेकिन पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी नजऱअंदाज़ नहीं किया जा सकता। आध्यात्मिक और भौतिक जीवन — दोनों एक पंछी के दो पंखों के समान हैं; एक को त्याग कर उड़ान नहीं भरी जा सकती। दाजी ने आगे कहा कि हमें अपनी पूरी क्षमता से कर्म करना चाहिए। केवल विश्वास रखना लीपापोती करने जैसा है; सच्ची ‘श्रद्धा’ के साथ दिव्यता का अनुभव होना चाहिए। चेतना का स्तर अपने-आप नहीं बदलता; यह हमारे भीतर बदलाव आने के साथ धीरे-धीरे ऊपर उठता है। आज़ादी का मतलब केवल जन्म न लेना नहीं है, बल्कि जन्म लेना भी आज़ादी का हिस्सा है। आध्यात्मिक प्रगति समय से पहले होनी चाहिए, क्योंकि नैतिक स्तर में गिरावट इतनी हो चुकी है कि हर पीढ़ी में कमज़ोर कडय़िाँ बन रही हैं। अगर हम चाहते हैं कि आने वाली पीढिय़ाँ बेहतर और मज़बूत बनें, तो आज ही मेहनत करनी होगी। बिना प्रयास के, हर प्रणाली क्षय को प्राप्त होती है — जैसे थर्मोडायनामिक्स का नियम बताता है। JITO Connec के उद्घाटन दिवस की एक राउंड-टेबल चर्चा में दाजी ने उच्च-मूल्य फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसानों और उद्यमियों को प्रशिक्षण देने की योजना पर भी बात की। उन्होंने सटीक कृषि-तकनीक, बायो-फर्टिलाइज़र्स और AI-आधारित सलाहकारी प्रणालियों के ज़रिए हार्टफुलनेस की भूमिका को समझाया, जिनसे बंजर ज़मीनें उपजाऊ फसलों में बदली जा सकती हैं और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकता है। दाजी ने शिक्षा और कृषि दोनों में AI के उपयोग पर ज़ोर देते हुए कहा कि हार्टफुलनेस से प्रशिक्षित नेता तकनीकी कौशल के साथ-साथ स्पष्टता, करुणा और साहस को भी अपनाएंगे। वे शिक्षा से उद्यमिता की ओर एक सेतु बनेंगे, जिसमें छात्रों को इन्क्यूबेशन, सीड फंडिंग और बाज़ार से जोडऩे की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा। इस मास्टरक्लास ने सभी प्रतिभागियों को गहराई से लाभान्वित किया। भले ही वे किसी भी क्षेत्र या पृष्ठभूमि से थे, सभी ने ज्ञान और प्रेरणा के महत्वपूर्ण बिंदु साथ लेकर सत्र का समापन किया।



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