आजादी की प्रतीक रही खादी में भी हो रहे नवाचार
हल्दी, चंदन, केसर, नीम और गुलाब से निर्मित हो रहे उत्पाद
सरकार दे रही ग्रामोद्योग को बढ़ावा, इन उत्पादों की बढ़ रही मांग
बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। कैमिकल से बने उत्पादों की बजाय अब हर्बल उत्पादों की मांग राजधानी जयपुर सहित पूरे प्रदेश में बढ़ रही है। राजस्थान खादी संघ व ग्रामोद्योग भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है। अब खादी के वस्त्रों के साथ-साथ बड़ी मात्रा में हर्बल उत्पादों का ग्रामोद्योग के माध्यम से निर्माण हो रहा है। खादी के अलावा बड़ी संख्या में नए उद्यम भी इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। इस कारण अब देश-प्रदेश में हर्बल उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है।
गौरतलब है कि राजस्थान की सांस्कृतिक और हस्तशिल्प नगरी अब हर्बल उत्पादों के स्टार्टअप्स के जरिए आयुर्वेदिक सौंदर्य उत्पादों में नई क्रांति ला रही है। इस दिशा में अब राजस्थान खादी संघ व ग्रामोद्योग सहित नए स्टार्टअप्स भी सक्रिय हैं। राजधानी जयपुर के जौहरी बाजार, बापू बाजार, वैशाली नगर और मानसरोवर जैसे स्थानीय क्षेत्रों में हल्दी, चंदन, केसर, नीम और गुलाब जैसे राजस्थानी जड़ी-बूटियों से बने स्किनकेयर, हेयरकेयर और साबुन उत्पादों को लोकप्रिय बना रहे हैं। ये उत्पाद देश-दुनिया तक अपनी पहचान बन रहे हैं। आईएमएआरसी की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में आयुर्वेदिक उत्पादों का बाजार 875.9 बिलियन रुपए तक पहुंचा, जिसमें 22 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। जयपुर में स्थानीय स्टार्टअप्स व ग्रामोद्योग ने इस मांग को भुनाना शुरू कर दिया है और स्थानीय बिक्री में 30 प्रतिशत लाभ की संभावना है।
हर्बल साबुन के अलावा अन्य उत्पाद भी लॉन्च
जयपुर में 20 से अधिक स्टार्टअप्स ने हल्दी-चंदन फेस मास्क, नीम फेस वॉश और केसर क्रीम लॉन्च किए, जिनकी मांग जयपुर में 25 प्रतिशत बढ़ी। जयपुर में 15 फूड और कॉस्मेटिक्स स्टॉल्स ने आयुर्वेदिक उत्पादों को शामिल किया, जिससे पर्यटकों की खरीदारी में 18 प्रतिशत वृद्धि हुई। 2024 में 12.5 लाख पर्यटकों ने जयपुर के बाजारों में खरीदारी की, जिसमें 40 प्रतिशत ने हर्बल उत्पादों को प्राथमिकता दी। ये स्टार्टअप्स डिजिटल मार्केटप्लेस जैसे प्लेटफार्म पर उपस्थिति बढ़ाई, जिससे ऑनलाइन बिक्री 35 प्रतिशत बढ़ी। जयपुर आधारित कई उत्पादों ने एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग कर व्यक्तिगत स्किनकेयर सॉल्यूशंस पेश किए।
हर्बल उत्पादों को मिल रहा बढ़ावा
जयपुर में हर्बल कॉस्मेटिक्स स्टार्टअप्स ने स्थानीय अर्थव्यवस्था में 15 प्रतिशत योगदान दिया। 2024 में हर्बल निर्यात 1,800 करोड़ रुपए तक पहुंचा, जिसमें यूरोप और अमरीका में 20 प्रतिशत मांग बढ़ी।

महिला उद्यमी भी आ रही सामने
हर्बल उत्पादों को बनाने में अब महिला उद्यमी भी सामने आ रही हैं। जयपुर में कई खुली यूनिट्स का संचालन महिला उद्यमी कर रही हैं। राजधानी जयपुर के बापू बाजार और चांदपोल क्षेत्र में 38 प्रतिशत महिला उद्यमियों ने अपने आउटलेट्स शुरू किए हैं। इससे सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला। कई स्थानीय उत्पादों जैसे चंदन-केसर लिप बाम और नीम शैंपू लॉन्च कर 10 लाख से अधिक का राजस्व कमाया है।
– गांधी जी का सपना था कि छोटे-छोटे उद्योगों के माध्यम से गांवों का विकास हो। इस दिशा में खादी सक्रिय हुआ और उसने कुटीर और छोटे उद्योगों के माध्यम से कई चीजों का निर्माण करना शुरू किया। खादी की एक शाखा है ग्रामोद्योग। इसमें साबुन, मसाला, शैंपू व सौंदर्य प्रसाधन आदि का निर्माण किया जाता है। पहले ग्लसरीन का साबुन बनाने में उपयोग कम होता है, लेकिन जैसे-जैसे बाजार में इसकी डिमांड आ रही। इसका निर्माण भी खादी कर रहा है। राजस्थान में करीब 150 संस्थाएं ग्रामोद्योग के माध्यम से इनका निर्माण कर रही हैं। वर्तमान में खादी में भी नवाचार हो रहे हैं। युवा पीढ़ी की डिमांड को देखते हुए व बाजार से मुकाबले के लिए खादी भी कई चीजों का निर्माण कर रहा है।
– गोविंद कुमार मिश्रा, मंत्री, राजस्थान खादी संघ

