जैसे-जैसे सोशल मीडिया का चलन तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे युवा-युवतियों में रील बनाने का चलन जोरों पर हो रहा है। पर रील बनाना कितना दुखदायी बन रहा है? यह भी हमें देखना होगा और सोचना होगा कि इस पर बंदिशें लगाई जाए। नहीं तो रील बनाने के चक्कर में आने वाले समय में बहुत सारे युवा अपनी जान गंवा बैठेंगे। पिछले काफी महीनों से रील बनाने का जुनून कई युवा वर्ग के सिर चढक़र बोल रहा है। इस जुनून के कारण ही इनमें से कई युवा अपनी जान भी गंवा बैठे हैं। रील बनाने वाले युवा वर्ग ऐसी उटपटांग हरकतें कर बैठते हैं, जिससे वे लोगों के मनोरंजन का साधन तो बनते ही हैं तथा इसके चक्कर में अपनी जान भी गंवा बैठते हैं। इसी वर्ष जनवरी में भोपाल में कोलार के इनायतपुर गांव में तीन युवक अपनी तेज गति से चलती कार की खिडक़ी से सिर बाहर निकाल कर रील बना रहे थे कि संतुलन बिगड़ जाने से कार पुल से नीचे नहर में गिर गई, जिससे दो युवकों की मौत तथा तीसरा घायल हो गया। वहीं मेरठ में पानी की टंकी पर चढ़ कर रील बना रहा एक युवक पैर फिसलने के कारण नीचे गिर कर मर गया। मार्च महीने में ही अहमदाबाद में रील बनाने के चक्कर में तीन युवकों की कार नदी में जा गिरी और तीनों युवक पानी में बह गए। अप्रैल माह में उत्तराखंड में एक महिला अपनी बच्ची के साथ मणिकर्णिका घाट पर स्नान करने के दौरान रील बनाते समय नदी में बह गई। वहीं जून महीने में आगरा के नगला नाथू गांव में यमुना नदी में रील बनाते समय छह युवतियां गहरे पानी में चली गई तथा भंवर में फंस जाने के कारण डूब जाने से उनकी मौत हो गई। इनमें से तीन युवतियांं एक ही परिवार की थीं। जून में ही बिहार के विश्वकर्मा ढाला में मालगाड़ी के इंजन पर चढ़ कर रील बनाते समय एक युवक हाईटेंशन तारों की चपेट में आ जाने से झुलस गया। रील बनाने का एक कारण यह भी है कि बहुत अधिक बार देखी जाने वाली तथा फॉलो व फारवर्ड किए जाने पर रील बनाने वालों को सोशल मीडिया साइट के संचालकों की ओर से आकर्षक धनराशि भी मिलने लगती है। राज्य सरकारों को बढ़ती रील बनाने की इन घटनाओं पर अंकुश लगाने की बहुत जरूरत है। अगर ऐसी घटनाएं सरकार की सूचना में आती हैं तो उस पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया जाना चाहिए।

