Wednesday, July 15, 2026 |
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फार्मा हब बनने की राह पर राजस्थान!

by Business Remedies
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  • जयपुर, अलवर, बीकानेर में दवा निर्माण, 18 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न
    डायबिटीज, हृदय रोग और एंटी-बॉयोटिक दवाएं बन रहीं
    देश के कारोबार में राज्य का योगदान 10,000 करोड़ रुपए
    बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। राजस्थान के 7 फार्मा क्लस्टर (जयपुर, अलवर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, सीकर) देश के फार्मास्यूटिकल मार्केट के 6 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। आईबीईएफ 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का फार्मा मार्केट 2024 में 50 बिलियन डॉलर था, जिसमें राजस्थान का योगदान 10,000 करोड़ रुपए रहा। इसमें निर्यात का योगदान 5,000 करोड़ था। ये क्लस्टर जेनेरिक दवाएं, वैक्सीन और बायोसिमिलर उत्पादन में 18 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न की संभावना के साथ, भिवाड़ी और जयपुर में 5,000 रोजगार सृजित हुए। हालांकि, आयात निर्भरता और नियामक जटिलताओं ने वृद्धि को 6-8 प्रतिशत तक सीमित रखा। जयपुर (वीकेआई, सीतापुरा) और अलवर (भिवाड़ी) प्रमुख हब हैं, जो डायबिटीज, हृदय रोग, और एंटी-बॉयोटिक दवाओं पर केंद्रित हैं।
    दवा कंपनियां और उत्पाद
    जयपुर में वीकेआई (विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र, सीतापुरा) 50 से अधिक कंपनियां, जैसे राजस्थान ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (आरडीपीएल), टैबलेट, कैप्सूल और ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्ट (ओआरएस) बनाती हैं। अलवर (भिवाड़ी) में 30 कंपनियां हैं। इनमें वेस्टर्न ड्रग्स लिमिटेड, पेनिसिलिन और नॉन-पेनिसिलिन आधारित दवाएं (एंटी-बायोटिक्स, एंटी-डायबिटिक) बनाती हैं। बीकानेर और जोधपुर में 20-25 कंपनियां एंटी-इन्फेक्टिव और कार्डियोवास्कुलर दवाएं उत्पादित करती हैं। उदयपुर और कोटा में 15-20 कंपनियां वैक्सीन और बायोसिमिलर पर ध्यान देती हैं। सीकर में छोटी इकाइयां जेनेरिक दवाएं बनाती हैं। ये दवाएं डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर और एंटी-बायोटिक उपचार के लिए हैं।
    निर्यात और कच्चा माल
    राजस्थान की दवाएं यूएसए (40 प्रतिशत, 2 बिलियन डॉलर), यूरोप (25 प्रतिशत), अफ्रीका (20 प्रतिशत) और एशिया (10 प्रतिशत) में निर्यात होती हैं। प्रमुख गंतव्य यूएस(2 बिलियन डॉलर), यूके (300 मिलियन डॉलर) और दक्षिण अफ्रीका (250 मिलियन डॉलर) हैं। कच्चा माल (एपीआई) 66 प्रतिशत चीन, 20 प्रतिशत जर्मनी और 10 प्रतिशत यूएसए से आयात होता है। राजस्थान में केवल 10 प्रतिशत एपीआई (भिवाड़ी, जयपुर) स्थानीय रूप से बनता है, जो एंटी-बायोटिक और कार्डियोवास्कुलर दवाओं में उपयोग होता है। आयात निर्भरता लागत को 30 प्रतिशत बढ़ाती है।
    विकास के लिए आवश्यक कदम
    स्थानीय एपीआई उत्पादन : भिवाड़ी और जयपुर में एपीआई पार्क स्थापित हों।
    बुनियादी ढांचा : सौर ऊर्जा (142 गीगा वॉट क्षमता) का उपयोग हो ताकि बिजली लागत कम हो।
    आर एंड डी निवेश : बायोटेक और बायोसिमिलर पर शोध के लिए एनआईपीईआर जयपुर में केंद्र बने।
    नियामक सुधार : ड्रग लाइसेंस प्रक्रिया को 6-8 सप्ताह में पूरा किया जाए।
    सरकारी पहल और निवेश
    राइजिंग राजस्थान 2024 में 7 फार्मा क्लस्टर (जयपुर, अलवर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, सीकर) के लिए 2,000 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित हुआ। पीएलआई स्कीम के तहत 500 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई, जिससे 10 ग्रीनफील्ड यूनिट्स शुरू हुईं। स्मैम योजना (कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन) और पीटीयूएएस योजनाओं ने एमएसएमई और डब्ल्यूएचओ-जीएमपी मानकों के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी दी। नमो ड्रोन दीदी योजना ने ड्रोन लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा दिया। आरडीपीएल (वीकेआई, जयपुर) को डब्ल्यूएचओ-जीएमपी अपग्रेड के लिए 7.1 करोड़ रुपए मिले।                                                                                                                                                                                                                                                                             – राजस्थान अब फार्मा हब बनने की ओर अग्रसर है। राज्य के कई जिलों में में अब बड़े पैमाने पर दवाओं का निर्माण कंपनियां कर रही हैं। राज्य में निर्मित दवाओं का विदेशों में निर्यात भी किया जा रहा है। इससे राज्य का राजस्व बढ़ रहा है और राजस्थान विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। राजस्थान के कई जिलों में दवा निर्माण की फार्मा यूनिट्स लगी हुई हैं। राज्य में मुख्य रूप से डायबिटिक, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों की दवाएं निर्मित हो रही है। राजधानी जयपुर में भी बड़े पैमाने पर दवाओं का उत्पादन हो रहा है। वर्तमान में जेनेरिक दवाएं, वैक्सीन और बायोसिमिलर उत्पादन में 18 प्रतिशत से अधिक वार्षिक रिटर्न की संभावना है।
    – देवेंद्र जैन, स्टॉकिस्ट, फार्मा विशेषज्ञ


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