जैन धर्मावलंबियों का एक महत्वपूर्ण पर्व पर्युषण आज से मनाया जाएगा है। यह केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता रहा है। पर्युषण पर्व 10 दिन तक चलेंगें। 12 वें दिन जैन धर्म के लोगों का महत्वपूर्ण त्योंहार संवत्सरी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन यथा शक्ति उपवास रखा जाता है। पर्युषण पर्व की समाप्ति पर संवत्सरी (क्षमायाचना) पर्व मनाया जाएगा। इन दस दिनों में श्रावक अपनी शक्ति अनुसार व्रत-उपवास आदि करते हैं। ज्यादा से ज्यादा समय भगवन की पूजा-अर्चना में व्यतीत करते हैं। पर्युषण पर्व मनाने का मूल उद्देश्य आत्मा को शुद्ध बनाने के लिए आवश्यक उपक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना होता है। पर्यावरण का शोधन इसके लिए वांछनीय माना जाता है। आत्मा को पर्यावरण के प्रति तटस्थ या वीतराग बनाए बिना शुद्ध स्वरूप प्रदान करना संभव नहीं है। इस दृष्टि से कल्पसूत्र या तत्वार्थ सूत्र का वाचन और विवेचन किया जाता है और संत-मुनियों तथा आचार्यों के सान्निध्य में स्वाध्याय किया जाता है। पूजा, अर्चना, प्रतिक्रमण, सामायिक समागम, त्याग, तपस्या, उपवास में अधिक से अधिक समय व्यतीत किया जाता है और दैनिक व्यावसायिक तथा सावद्य क्रियाओं से दूर रहने का प्रयास किया जाता है। संयम और विवेक का प्रयोग करने का अभ्यास चलता रहता है। परोक्ष रूप से वे यह संकल्प करते हैं कि वे पर्यावरण में कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे। मन, वचन और काया से जानते या अनजाने में वे किसी भी हिंसा की गतिविधि में भाग ना तो स्वयं लेंगे, ना दूसरों को लेने को कहेंगे और ना लेने वालों का अनुमोदन करेंगे। यह आश्वासन देने के लिए कि उनका किसी से कोई बैर नहीं है, वे यह भी घोषित करते हैं कि उन्होंने विश्व के समस्त जीवों को क्षमा कर दिया है और उन जीवों को क्षमा मांगने वाले से डरने की जरूरत नहीं है। इन 10 दिन में सुबह एवं शाम को प्रतिक्रमण करते हुए पूरे साल में किए गए पाप और कटू वचन से किसी के दिल को जानते और अनजाने ठेस पहुंची हो तो क्षमा याचना करते हैं। हाथ जोड़ कर गले मिलकर मिच्छामी दूक्कडम करते हैं।

