विश्वभर में हर साल की भांति आज वल्र्ड जूनोसिस दिवस मनाया जाएगा। जानवरों से इंसानों में फैलने वाले जूनोटिक बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। जूनोटिक बीमारियों से जानवर और इंसान के स्वास्थ्य पर पडऩे वाले खतरों के बारे में जागरूकता फैलाते हुए इस तरह की बीमारियों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चिंतन किया जाता है। जूनोटिक बीमारियों की रोकथाम के दिशा में काम करने वालों के लिए इस दिन का खास महत्व है। विश्व जूनोसिस दिवस की स्थापना 6 जुलाई, 1885 को हुई थी, जब लुई पाश्चर ने रेबीज से पीडि़त एक लडक़े, जोसेफ मेस्टर को पहला टीका लगाया था। यह एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने जूनोटिक रोगों के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ दिया। तब से विश्व जूनोसिस दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि जूनोटिक रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके और उनके प्रसार को रोकने के लिए कदम उठाए जा सकें।
जूनोटिक रोग जैसे कि रेबीज, इबोला और कोविड-19, मानव स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा हैं। ये रोग जानवरों से मनुष्यों में फैलते हैं और महामारी का कारण बन सकते हैं। विश्वभर में ऐसी घटनाएं कई बार हो चुकी है। इसलिए विश्व जूनोसिस दिवस का उद्देश्य भी इन रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, उनके प्रसार को रोकने के लिए निवारक उपाय करना और मानव और पशु स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझना है।

