नई दिल्ली : PhonePe ने यूपीआई पेमेंट्स के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन लॉन्च करने की घोषणा की है, जिससे यूज़र्स को पहले से कहीं तेज़ और ‘वन-टच’ पेमेंट एक्सपीरियंस मिलेगा। यह नया फ़ीचर यूज़र्स को उनके स्मार्टफ़ोन पर पहले से मौजूद सुरक्षा प्रणाली जैसे कि फिंगरप्रिंट या फ़ेस रिकग्निशन का उपयोग करके ट्रांजेक्शन को ऑथराइज़ करने की सुविधा देता है। इससे, अब पेमेंट के लिए मैन्युअल रूप से यूपीआई पिन डालने की ज़रूरत नहीं होगी। इसे लॉन्च के साथ, PhonePe उन चुनिंदा बड़ी कंपनियों में शामिल हो गया है जो इस फ़ीचर को इतने बड़े स्तर पर मार्केट में लेकर आई हैं।
इसके लॉन्च के मौके पर बोलते हुए, PhonePe के Head of Payments, Deep Agrawal ने कहा, “PhonePe में हमारा लक्ष्य हमेशा से डिजिटल पेमेंट्स को सभी भारतीय के लिए बेहद सहज और सुलभ बनाना रहा है। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन को शामिल कर, हम बिना किसी रुकावट वाले पेमेंट एक्सपीरियंस की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहे हैं। यह फ़ीचर न सिर्फ़ समय बचाता है, बल्कि इससे यूज़र्स को Hardware-Level की सुरक्षा भी मिलती है, जो उनके रोज़ के ट्रांज़ेक्शन को सुरक्षित बनाती है। हमारा मानना है कि पेमेंट के प्रोसेस से सामान्य रुकावटों को दूर करके, हम डिजिटल पेमेंट्स को हर किसी के लिए और अधिक आसान और सुरक्षित बना रहे हैं।”
यह फ़ीचर, यूज़र को पेमेंट में आने वाली आम समस्याओं को दूर करके डिजिटल पेमेंट की सुरक्षा और उस पर भरोसे, दोनों को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह Device-Level बायोमेट्रिक वेरिफ़िकेशन के उपयोग से सुनिश्चित करता है कि यूज़र्स भीड़ वाली जगहों पर भी सुरक्षित ट्रांजेक्शन कर सकें। इस फ़ीचर से, यूज़र्स का पिन, ट्रांज़ेक्शन के समय किसी अन्य व्यक्ति के देख लेने या लीक होने का खतरा खत्म हो जाएगा। सुरक्षा के साथ-साथ, यह फ़ीचर पेमेंट असफल होने की समस्या को भी काफ़ी कम कर देता है, क्योंकि अक्सर लोग पिन भूलने या गलत पिन टाइप करने की वजह से ट्रांज़ेक्शन नहीं कर पाते थे। यूज़र्स के एक जैसा एक्सपीरियंस को बनाए रखने के लिए, इसमें एक आसान ‘फ़ॉल-बैक’ मैकेनिज्म भी शामिल है। इसका मतलब है कि अगर कम रोशनी या सेंसर की समस्या के कारण बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन नहीं हो पाता है, तो यूज़र्स के पास तुरंत अपने यूपीआई पिन को उपयोग करने का विकल्प भी होगा।
वर्तमान Regulatory Guidelines का पालन करते हुए यह ‘वन-टच’ फ़ीचर, Device-Level बायोमेट्रिक वेरिफ़िकेशन का उपयोग करता है। यह ₹5,000 तक के यूपीआई ट्रांज़ेक्शन के लिए एक सुरक्षित ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ लेयर के रूप में काम करता है। हालाँकि, इससे ज़्यादा राशि के ट्रांज़ेक्शन की सुरक्षा के लिए यूज़र्स को यूपीआई पिन का ही उपयोग करना होगा। यूज़र्स अपने रोज़ के कामों जैसे, एक अकाउंट से दूसरे में पैसे भेजने, स्टोर पर क्यूआर स्कैन करने, ऑनलाइन पेमेंट करने और यहाँ तक कि बैंक बैलेंस चेक करने के लिए भी इस बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का उपयोग कर सकेंगे। यह फ़ीचर फ़िलहाल एंड्रॉयड यूज़र्स के लिए उपलब्ध है, जिसमें फ़िगरप्रिंट और फ़ेस रिकग्निशन दोनों को शामिल किया गया है। iOS यूज़र्स के लिए भी यह फ़ीचर जल्द ही लॉन्च होने की उम्मीद है।

