सौर, पवन, जल, बायोमास आदि स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य को लेकर आज भारतीय अक्षय ऊर्जा दिवस मनाया जाएगा। वर्तमान में इसकी आवश्यकता भी है, क्योंकि जिस तरह से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है और बिजली की दरें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि अक्षय ऊर्जा जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करती है। प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद करती है। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में ऊर्जा की पहुंच बढ़ा सकती है। भारत के स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पिछले वर्षों से भारत में अक्षय ऊर्जा का विस्तार तेजी से हुआ है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष 30 जून तक बड़े जलविद्युत को छोडक़र कुल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता लगभग 236.52 गीगावाट थी, जिसमें सौर ऊर्जा की क्षमता लगभग 162.15 गीगावाट और पवन ऊर्जा की लगभग 57.44 जीडब्लू थी। बढ़ती ऊर्जा मांग और जलवायु संकट के बीच अक्षय ऊर्जा ही विकल्प है। इससे ना सिर्फ पर्यावरण बचेगा बल्कि लंबे समय में लागत भी कम होगी और देश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा। आज यह दिवस केवल एक व्यक्ति की जयंती से जुड़ा आयोजन ना होकर स्वच्छ, टिकाऊ और भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था के प्रति जागरूकता का अवसर माना जाता है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भारत में इस क्षेत्र की नीतियों और कार्यक्रमों का प्रमुख केंद्रीय मंत्रालय है। केंद्र सरकार ने वर्ष, 2004 से हर वर्ष 20 अगस्त को राजीव गांधी अक्षय ऊर्जा दिवस के रूप में देशभर में नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति जन-जागरूकता अभियान आयोजित करना भी शुरू किया है। अक्षय ऊर्जा दिवस हमें याद दिलाता है कि आज की बचत आने वाली पीढिय़ों का भविष्य है।

