विदेश में रहकर भी भारत के प्रति प्यार…
कोईभी व्यक्तिकितनी भी ऊंचाईछूले इसके बाद भी अपनी मातृभूमि के प्रति मान और सम्मान नही हो तो वह व्यक्तिकभी भी मातृभूमि के ऋण से मुक्त नही हो सकता चितौडग़ढ़ जिले के बेगूं कस्बे के मूल निवासी आनंद सुराना ने अपने जीवन की व्यवसायिक शुरूआत एक मेडिकल कंपनी के रिपे्रजेंटी बनकर शुरु की निष्ठापूर्वक कार्य करने के कारण कंपनी ने उन्हें खूब मान और सम्मान भी प्रदान किया परंतु उन्हें भारत के बाहर जाना था इसलिए अपने रिश्तेदारो के कहने पर जवाहरात के व्यवसाय से जुड़ गए भले ही वे इस व्यवसाय के बारे में कुछ नही जानते थे परंतु लगन और व्यवहार कुशलता ने उन्हें न्यूयॉर्क का सफल व्यवसायी बना दिया वकील पिता के पुत्र आनंद सुराना को अनेक कठिनाईयों का सामना भी करना पड़ा, पिता कंचन सिंह सुराना वरिष्ठ वकील होते हुए भी पैसे की दौड़ से कोसो दूर थे इसलिए परिवार का खर्चा चलाने का जिम्मा आनंद सुराना की शिक्षक माता चंद्रकला सुराना के जिम्मे आगया और उन्होंने भी हजारों बच्चो का जीवन संवारने के साथ ही अपने पुत्र को भी कठोर अनुशासन में कसकर नेक दिल इंसान बना दिया। प्रारंभ में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव रहे आंनद सुराना ने राजस्थान में मेडिकल रिप्रेजेंटिव कार्य से जुड़े युवाओं का जीवन संवारने के लिए न्यूयॉर्क में अपने कारोबार के साथ-साथ जयपुर में हेल्थ फार्मा एकेडमी की स्थापना कर इस करोबार में आने वाले युवाओं को रोजगार दिलाने का सपना संजोया है उन्होनें प्रति वर्ष 300 युवाओ को देश विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने का संकल्प लिया है 21 फरवरी 1970 को जन्मे आंनद सुराना ने दो वर्ष तक प्रसिद्ध फार्मा कंपनी एलएमबिक में कार्य किया उदयपुर के साइंस कॉलेज से शिक्षित सुराना ने थाईलैंड, बैंकॉक आदि देशों में रत्नत्नव्यवसाय करने के बाद न्यूयॉर्क में स्वयं को सेटल्ड कर लिया आपको एक पुत्र एवं एक पुत्री है वह भी विदेश में ही रहकर अंतर्राष्ट्रीय कंपनी में काम कर के भारत का नाम रोशन कर रहे है। आनंद सुराणा न्यूयॉर्क स्थित एनआरआई फेडरेशन के सचिव होने के नाते वहां रह रहे सभी भारतीयों को अपनी मातृभूमि से जोड़े रखने के लिए समय-समय पर अनेक आयोजन करते रहते है।
उमेन्द्र दाधीच
@बिज़नेस रेमेडीज




