Tuesday, September 22, 2026 |
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वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक बाजार 4% नीचे, एफपीआई ने 36,500 करोड़ रुपये निकाले

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/मुंबई (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह 2.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसकी प्रमुख वजह मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंताएं रहीं। सप्ताह के दौरान सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।

सबसे ज्यादा दबाव रियल्टी सेक्टर पर देखने को मिला, जिसमें 11.33 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, टेलीकॉम और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी सेक्टर भी 5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए।

हफ्ते के दौरान निफ्टी में 2.51 प्रतिशत की गिरावट आई। आखिरी कारोबारी दिन निफ्टी 0.95 प्रतिशत फिसलकर 25,048 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स शुक्रवार को 769 अंक यानी 0.94 प्रतिशत गिरकर 81,537 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स 2.43 प्रतिशत नीचे रहा।

स्मॉल और मिडकैप शेयरों पर बिकवाली का दबाव ज्यादा देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 4.58 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 5.81 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बैंक निफ्टी भी कमजोर रहा और एक अहम सपोर्ट लेवल 58,800 के नीचे फिसल गया, जिससे बाजार के लिए नकारात्मक संकेत मिले।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सप्ताह की शुरुआत में कुछ आईटी और बैंकिंग कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों से बाजार को थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन बाद में कई कंपनियों के कमजोर नतीजों ने निवेशकों की धारणा को फिर से कमजोर कर दिया।

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड और टैरिफ को लेकर दिए गए सख्त बयानों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ाई। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा और बिकवाली तेज हो गई। इसके अलावा वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ मामलों की समीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को और सीमित कर दिया।

1 जनवरी 2026 से अब तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने करीब 36,500 करोड़ रुपये के शेयर बाजार से निकाले हैं।

इसी बीच भारतीय रुपया भी कमजोर होकर लगभग 92 रुपये प्रति डॉलर के पास पहुंच गया है, जिससे आयात महंगा होने और महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ गई है।

अब निवेशकों की नजर केंद्रीय बजट 2026 और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेतों पर टिकी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बजट से पहले कुछ समय के लिए बाजार में सीमित तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि कई विदेशी निवेशकों की शॉर्ट पोजिशन पहले से बनी हुई हैं। हालांकि, बाजार में स्थायी सुधार तभी संभव है जब वैश्विक हालात सुधरें, कंपनियों के नतीजे बेहतर रहें और बजट से निवेशकों का भरोसा मजबूत हो।



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