• स्वदेशी शिक्षा, चिकित्सा, अर्थव्यवस्था और सनातन जीवन पद्धति को अपनाने पर जोर
• भारत को विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक, सैन्य और आध्यात्मिक शक्ति बनाने का संकल्प
• जाति, भाषा, प्रांत और संप्रदाय के नाम पर किसी भी उन्माद से बचने की अपील
• गौ-आधारित अर्थव्यवस्था से राष्ट्र निर्माण का आह्वान
राष्ट्रीय/हरिद्वार, 26 जनवरी 2026। देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पतंजलि योगपीठ के परमाध्यक्ष योगऋषि स्वामी रामदेव और महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि वेलनेस, फेस-2 में ध्वजारोहण कर देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने राष्ट्रसेवा के लिए स्वदेशी शिक्षा, स्वदेशी चिकित्सा, स्वदेशी अर्थव्यवस्था, स्वदेशी सनातन जीवन पद्धति और स्वदेशी से स्वावलंबी विकसित भारत के पञ्चप्रण दिलाए।
स्वामी रामदेव ने कहा कि आज पूरी दुनिया टैरिफ युद्ध, सत्ता का उन्माद, संपत्ति का उन्माद और धार्मिक कट्टरता के दौर से गुजर रही है। ऐसे में भारत को एक भारत, श्रेष्ठ भारत, स्वस्थ, समृद्ध और संगठित राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक, सैन्य, राजनीतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक शक्ति के रूप में स्थापित करना समय की आवश्यकता है, ताकि पूरी दुनिया भारत से प्रेरणा ले सके।
उन्होंने स्वदेशी अपनाने और मैकाले की शिक्षा प्रणाली तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अंधानुकरण के बहिष्कार का आह्वान किया। स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह वह दिन देखना चाहते हैं जब भारतीय रुपया डॉलर से अधिक मजबूत बने, और यह तभी संभव है जब 140 करोड़ भारतीय एकजुट होकर पुरुषार्थ करें।
स्वामी रामदेव ने कहा कि आज कई पड़ोसी देशों और वैश्विक स्तर पर भारत विरोधी और सनातन विरोधी ताकतें सक्रिय हैं। ऐसे में गणतंत्र दिवस पर यह संकल्प लेना होगा कि देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए पूरा समाज एक परिवार की तरह एकजुट हो। उन्होंने कहा कि साधु-संतों और शंकराचार्यों के बीच कोई विवाद न हो, न जाति, वर्ण, भाषा, प्रांत या समुदाय के नाम पर कोई उन्माद फैले। उन्होंने कहा कि भारत मजबूत होगा, तभी दुनिया में कहीं भी हिंदुओं पर अत्याचार करने का दुस्साहस नहीं होगा। जैसे इजराइल अपनी मजबूती के कारण सुरक्षित है, वैसे ही भारत को भी हर मोर्चे पर सशक्त बनना होगा।यूसीसी के एक वर्ष पूर्ण होने पर, स्वामी रामदेव ने कहा कि एक देश, एक संविधान, एक झंडा, एक संकल्प और एक भारत की भावना से ही श्रेष्ठ और विकसित भारत का निर्माण संभव है।
गौ-आधारित अर्थव्यवस्था पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि गौ-माता को केवल राष्ट्र माता नहीं बल्कि विश्व माता के रूप में स्थापित करना होगा, लेकिन यह तभी संभव है जब हर व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम 10 रुपये का गौ-आधारित उत्पाद उपयोग करे। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हो, तो प्रतिदिन हजारों करोड़ रुपये गौ-सेवा के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। उन्होंने प्रत्येक हिंदू से एक गाय पालने और गौ-आधारित कृषि को बढ़ावा देने की अपील की।
इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें उन वीरों, शहीदों और क्रांतिकारियों की याद दिलाता है, जिनके बलिदान से आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य छोटे नहीं, बल्कि बड़े राष्ट्रीय और सामाजिक लक्ष्यों की प्राप्ति होना चाहिए, ताकि भारत पुनः विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित हो सके।











