मुंबई,
भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है, जिससे आगे की वृद्धि को सहारा मिल रहा है। हालांकि, यदि India–US Trade Deal तय होने में देरी होती है और यह अनिश्चितता लंबी खिंचती है, तो Reserve Bank Of India को फिर से Rate Cut करना पड़ सकता है। Goldman Sachs ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यदि व्यापार से जुड़ी बाधाएं FY27 की पहली तिमाही से आगे तक बनी रहती हैं और वृद्धि पर दबाव डालती हैं, तो RBI अपने पास उपलब्ध नीतिगत गुंजाइश का उपयोग कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश में आम उपभोग विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी निम्न आय वर्ग में अभी सुधार के शुरुआती दौर में है। अच्छा फसल चक्र, राज्यों द्वारा महिलाओं को बढ़ा हुआ आर्थिक हस्तांतरण और GST में कमी जैसे कदमों से मांग को सहारा मिला है। इन कारणों से धीरे-धीरे बाजार में खरीदारी बढ़ रही है, भले ही वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। Goldman Sachs के भारत मामलों के मुख्य अर्थशास्त्री Santanu Sengupta ने NDTV Profit से बातचीत में कहा कि India–US Trade Deal को FY27 की पहली तिमाही तक अंतिम रूप दिया जा सकता है। लेकिन यदि यह समझौता अगली वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही तक टल जाता है, तो आर्थिक वृद्धि के सामने बाधाएं खड़ी हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में सरकार और Reserve Bank Of India को नीतिगत कदम उठाने पड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर खपत का रुख सकारात्मक है, लेकिन सभी आय वर्गों में स्थिति एक समान नहीं है। उच्च और मध्यम आय वर्ग, जिसने Covid-19 के बाद तेज वृद्धि देखी थी, अब कुछ धीमापन दिखा रहा है। मध्यम आय वर्ग में रोजगार सृजन को लेकर चिंता और नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग से दबाव महसूस किया जा रहा है। नीतिगत स्तर पर केंद्र सरकार ने FY26 में राजकोषीय संतुलन की गति को थोड़ा धीमा किया और आयकर तथा उपभोग कर में कमी के जरिए मांग बढ़ाने पर ध्यान दिया। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में देश ने 7.6 प्रतिशत की वार्षिक वास्तविक वृद्धि दर्ज की। हालांकि, महामारी काल को छोड़कर नाममात्र वृद्धि छह वर्षों के निचले स्तर पर रही, जिसका मुख्य कारण बहुत कम महंगाई दर रही।

