बिजनेस रेमेडीज़/मुंबई। भारत में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश 26 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं, जो भारत की आर्थिक प्रगति में दुनिया भर के भरोसे को दिखाता है। मजबूत कृषि उत्पादन, अच्छे मानसून और त्योहारों के सीजन में उपभोक्ता मांग में सुधार ने कई सेक्टर में निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाया है। यह बात है। कैलेंडर ईयर 2025 के पहले 9 महीनों (जनवरी से सितंबर) में ही प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश की कुल राशि पूरे 2023 और 2024 में हुए कुल निवेश को पार कर चुकी है। डील की संख्या में भी जबरदस्त उछाल आया है। जनवरी से सितंबर 2025 के बीच 1,363 ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड किए गए, जबकि पूरे 2024 में 1,170 सौदे हुए थे। यह साफ तौर से दर्शाता है कि भारत में डील पाइपलाइन बढ़ रही है और निवेशकों का उत्साह बहुत अधिक है।
इक्विरस कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के प्रमुख, भावेश शाह ने कहा कि, “कैलेंडर ईयर 2025 में डील यानी सौदों का मूल्य बढऩे की वजह यह है कि 10 मिलियन डॉलर से छोटी डील का हिस्सा कुल डील में घटकर 40% हो गया है, जो 2024 में 47% था। वहीं, 10 से 25 मिलियन डॉलर के बीच के मध्यम आकार की डील बढक़र 31% हो गई हैं, जो 2024 में 21% थीं।”
इस डील की संरचना (डील कंपोजिशन) में इस बदलाव के कारण, एवरेज डील की मूल्य 2024 के 34.4 मिलियन डॉलर से बढक़र 2025 में 36.6 मिलियन डॉलर हो गई है।
भारत के जारी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ने सूचना प्रौद्योगिकी और कंज्यूमर स्टेपल्स को निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक सेक्टर बना दिया है। आईटी सेक्टर की हिस्सेदारी कुल PE/VC डील वैल्यू में 2024 के 23% से बढक़र 2025 में 35% हो गई है। यह बढ़ोतरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, SaaS एक्सपोर्ट्स, और एआई आधारित बिजनेस सॉल्यूशंस की मजबूत मांग से हुई है।

