नई दिल्ली:
किसानों को बेहतर दाम दिलाने की पहल
केंद्र सरकार की प्रमुख योजना Pradhan Mantri Annadata Aay Sanrakshan Abhiyan (PM-AASHA) किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और मजबूरी में कम कीमत पर बिक्री रोकने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है। आधिकारिक factsheet के अनुसार, योजना के तहत कृषि उपज की procurement, price stabilisation और market intervention को व्यवस्थित बनाया गया है, जिससे किसानों की आय और कृषि अर्थव्यवस्था की स्थिरता को समर्थन मिला है।
दाल, तिलहन और Copra की समय पर खरीद
PM-AASHA के तहत NAFED और NCCF जैसी agencies के माध्यम से दालों, तिलहन और Copra की समय पर procurement सुनिश्चित की गई है। किसानों की market access बढ़ाने के लिए अतिरिक्त procurement centres भी स्थापित किए गए हैं। इससे किसानों को सामूहिक रूप से मजबूत करने और उन्हें बेहतर बाजार विकल्प उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
Digital reforms से बढ़ी पारदर्शिता
Aadhaar-enabled authentication, e-NAM, e-Samriddhi और e-Samyukti जैसे Digital platforms ने procurement प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। Agriculture Infrastructure Fund और बढ़े हुए procurement coverage ने भी योजना की पहुंच मजबूत की है।
Budget allocation में लगातार बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2024-25 में PM-AASHA पर वास्तविक खर्च ₹5,437.99 करोड़ रहा। 2025-26 में Budget बढ़कर ₹6,941.36 करोड़ और 2026-27 में ₹7,200 करोड़ कर दिया गया। यह किसानों को price assurance देने पर सरकार के बढ़ते फोकस को दर्शाता है।
MSP से किसानों को बेहतर Margin
2026-27 में Paddy की उत्पादन लागत ₹1,627 प्रति क्विंटल और MSP ₹2,441 है, जिससे ₹814 का Margin मिलता है। Soybean में यह Margin ₹1,903 और Wheat में ₹1,346 है। वहीं Jute की लागत ₹3,662 और MSP ₹5,925 प्रति क्विंटल है, जिससे ₹2,293 का सबसे अधिक Margin मिलता है।

