सरदार स्वर्ण सिंह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी और आईआईटी खडग़पुर से कंपनी ने की सहभागिता
महापे में 3,500 वर्ग फीट के नए रिसर्च इनोवेशन सेंटर का विस्तार
बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। ‘ऑर्गेनिक रीसाइक्लिंग सिस्टम्स लिमिटेड’ सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट सॉल्यूशन उपलब्ध कराने वाली इंजीनियरिंग कंपनी है। कंपनी विशेषज्ञ संस्थानों से रणनीतिक सहभागिता कर प्रगति पथ पर अग्रसर है। हाल ही में कंपनी ने सरदार स्वर्ण सिंह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी और आईआईटी खडग़पुर से सहभागिता की है। इसके चलते कंपनी का शेयर फोकस में है। इस लेख में कंपनी की कारोबारी गतिविधियां, वित्तीय प्रदर्शन, सहभागिता और लिस्टिंग के मायने जैसे विषयों पर प्रकाश डाला गया है।
कंपनी की कारोबारी गतिविधियां
वर्ष 2008 में कंपनी का इनकॉरपोरेशन हुआ था। ‘ऑर्गेनिक रीसाइक्लिंग सिस्टम्स लिमिटेड’ सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट सॉल्यूशन उपलब्ध कराने वाली इंजीनियरिंग कंपनी है। ऑर्गेनिक रीसाइक्लिंग सिस्टम के बिजनेस वर्टिकल में बिल्ड ओन ऑपरेट ट्रांसफर (बीओओटी) मॉडल, इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कमीशनिंग (ईपीसी) मॉडल और प्रमुख उपकरणों की आपूर्ति शामिल हैं। कंपनी अपशिष्ट प्रबंधन में ईपीसी (इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण) सेवाएं, कमीशनिंग सेवाएं, अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में परामर्श और सलाहकार सेवाएं, योजना, निर्माण और अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं, प्रयोगशाला सेवाओं आदि का प्रबंधन करने जैसी सेवाएं प्रदान करती है। ऑर्गेनिक रीसाइक्लिंग सिस्टम्स (ओआरएस) ने म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्ल्यू) को बिजली और खाद में बदलने के लिए सोलापुर, महाराष्ट्र में एक एमएसडब्ल्यू प्रसंस्करण और निपटान संयंत्र भी स्थापित किया है। कंपनी ने एक पेटेंटयुक्त ड्राई एनारोबिक डाइजेशन (ड्रायड) तकनीक विकसित की है जो कई प्रकार के कचरे का ट्रीटमेंट करने में सक्षम है और सोलापुर संयंत्र में इसके उपयोग से यह साबित भी हुआ है।
कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2021 में कंपनी ने 15.78 करोड़ रुपए का राजस्व एवं 4.49 करोड़ रुपए की कर पश्चात शुद्ध हानि, वित्त वर्ष 2022 में कंपनी ने 17.56 करोड़ रुपए का राजस्व एवं 5.35 करोड़ रुपए की कर पश्चात शुद्ध हानि और वित्त वर्ष 2023 में कंपनी ने 25.34 करोड़ रुपए का राजस्व एवं 3.64 करोड़ रुपए का कर पश्चात शुद्ध लाभ अर्जित किया है। समाप्त वित्त वर्ष 2024 में कंपनी ने 27.79 करोड़ रुपए का राजस्व और 7.76 करोड़ रुपए का कर पश्चात शुद्ध लाभ अर्जित किया है। 30 सितंबर 2024 को समाप्त छमाही में कंपनी ने 17.65 करोड़ रुपए का राजस्व और 6.77 करोड़ रुपए का कर पश्चात शुद्ध लाभ अर्जित किया है। वित्तीय परिणामों से स्पष्ट है कि कंपनी का कारोबार साल दर साल बढ़ रहा है।
एसएसएस-एनआईबीई से सहभागिता
एसएसएस-एनआईबीई और ओआरएसएल ने नेपियर घास सह-पाचन के लिए पायलट प्लांट कमीशनिंग के साथ बायोगैस नवाचार को आगे बढ़ाया है। कंपनी की सोलापुर सुविधा में पायलट बायोगैस प्लांट कमीशनिंग के लिए तैयार है, जिससे बड़े पैमाने पर अक्षय ऊर्जा समाधानों का मार्ग प्रशस्त होगा। सरदार स्वर्ण सिंह राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा संस्थान (SSS-NIBE) और ऑर्गेनिक रिसाइक्लिंग सिस्टम्स लिमिटेड (ORSL) के बीच सहयोग बीज आधारित सह-पाचन तकनीक के माध्यम से बायोगैस उत्पादन को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण चरण पर पहुंच गया है। यह रणनीतिक साझेदारी, एनारोबिक पाचन के लिए नेपियर घास और अन्य क़ृषि अवशेषों का उपयोग करने पर केंद्रित है, जो अब अनुसंधान से व्यावहारिक कार्यान्वयन में परिवर्तित हो रही है। जैसा कि भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए अक्षय ऊर्जा समाधानों की तलाश जारी रखे हुए है और दोनों संगठन बायोमास आधारित बायोगैस उत्पादन की पूरी क्षमता को अनलॉक करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस सहयोग में सबसे महत्वपूर्ण विकासों में से एक कंपनी की सोलापुर सुविधा में एक पायलट बायोगैस संयंत्र की स्थापना है, जो अब कमीशनिंग के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह पायलट सुविधा बीज-आधारित सह-पाचन प्रक्रिया के परीक्षण और परिशोधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे शोधकर्ताओं और इंजीनियरों को फीडस्टॉक उपयोग को अनुकूलित करने और बायोगैस पैदावार बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्नत अवायवीय पाचन तकनीकों को एकीकृत करके, संयंत्र तकनीकी प्रक्रियाओं और परिचालन मापदंडों के सत्यापन की सुविधा भी प्रदान करेगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि तकनीक दक्षता और दीर्घकालिक व्यवहार्यता के लिए अनुकूलित है। इस इकाई की सफल कमीशनिंग अभिनव फीडस्टॉक रणनीतियों का उपयोग करके बायोगैस उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
सोलापुर बायो-एनर्जी सिस्टम्स प्रा. लि. ने नेपियर घास की खेती शुरू की
ऑर्गेनिक रिसाइक्लिंग सिस्टम्स लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी सोलापुर बायो-एनर्जी सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड ने सोलापुर में अपने बायोगैस प्लांट के लिए आपूर्ति-पक्ष जोखिमों को कम करने के अपने रणनीतिक प्रयासों के हिस्से के रूप में नेपियर घास की खेती शुरू की है। इस तेजी से बढऩे वाली और ऊर्जा से भरपूर फसल को शुरू करके कंपनी का लक्ष्य सह-पाचन प्रक्रियाओं के माध्यम से बायोगैस उत्पादन के लिए एक सुसंगत और विश्वसनीय फीडस्टॉक सुनिश्चित करना है। बायोगैस प्लांट के संचालन में नेपियर घास को शामिल करने से नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट से संपीड़ित बायोगैस परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता बढऩे की उम्मीद है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ ऐसी खेती के लिए संसाधन उपलब्ध हैं। नेपियर घास अपनी उच्च बायोमास उपज के लिए जानी जाती है और यह जैविक फीडस्टॉक की अस्थिर आपूर्ति को संबोधित करने के लिए एक आशाजनक समाधान है, जो अक्सर बायोगैस संयंत्रों के संचालन में बाधा उत्पन्न कर सकता है। एसबीईएसपीएल द्वारा अपने सोलापुर बायोगैस सुविधा के 30 किलोमीटर के दायरे में कैप्टिव फार्मों पर घास की खेती करने का निर्णय लिया गया है । यह इकाई प्रति किलोग्राम बायोमास से ऊर्जा उत्पादन को अनुकूलित करने के लिए कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस नवीकरणीय संसाधन को संयंत्र के संचालन में सफलतापूर्वक एकीकृत करने के लिए विशिष्ट ऊर्जा उपज आवश्यकताओं और लागू परमिटों के अनुपालन में खेती की जाएगी।
आईआईटी खडग़पुर से एमओयू
ऑर्गेनिक रिसाइक्लिंग सिस्टम्स लिमिटेड ने अपशिष्ट से ऊर्जा एवं उत्प्रेरक प्रौद्योगिकी अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय महत्व के एक प्रमुख संस्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खडग़पुर (IITKGP) के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते में छह मुख्य तकनीकी क्षेत्रों की पहचान की गई है जहां संयुक्त प्रयास दोनों संस्थानों के बीच भविष्य के अनुसंधान एजेंडे को आकार देंगे। प्रमुख फोकस क्षेत्रों में से एक कार्बन डाइऑक्साइड (co2) को मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित करने के लिए उत्प्रेरक का विकास है। टीमें co2 मीथेनेशन और मिश्रित अल्कोहल में रूपांतरण के लिए उन्नत उत्प्रेरक प्रक्रियाओं पर काम करेंगी, जो उपयोगी ईंधन का उत्पादन करते हुए ग्रीनहाउस गैसों को कम करने की संभावना रखती हैं। वे प्रयोगात्मक और कम्प्यूटेशनल दोनों तरीकों का उपयोग करके मीथेन क्रैकिंग और रिफॉर्मिंग तकनीकों का भी पता लगाएंगे।
महापे में 3,500 वर्ग फीट के नए रिसर्च इनोवेशन सेंटर का विस्तार
ऑर्गेनिक रिसाइक्लिंग सिस्टम्स लिमिटेड (ओआरएसएल) ने महापे में 3,500 वर्ग फीट के नए रिसर्च इनोवेशन सेंटर (आरआईसी) सुविधा के विस्तार के साथ टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन और जैव ऊर्जा उन्नति की अपनी खोज में एक महत्वपूर्ण आयाम स्थापित किया है। यह बायोएनर्जी और बायोमटेरियल में नवाचार की सीमाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अभूतपूर्व अनुसंधान और सहयोगी परियोजनाओं के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। आरआईसी में प्रमुख विकासों में से एक संजीवक कार्बनाइजेशन सिस्टम है, जो बायोमास को कार्बनीकृत करने और उच्च मूल्य वाले कार्बन उत्पादों का उत्पादन करने के लिए डिजाइन की गई एक क्रांतिकारी तकनीक है। इसके अलावा, केंद्र बायोमीथेनेशन प्रक्रियाओं की दक्षता और स्थिरता को बढ़ाने के लिए जैव सामग्री, जैव उत्तेजक, जैव उत्प्रेरक, जैव उर्वरक और लागत प्रभावी स्क्रबर मीडिया में नवाचारों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
42 वर्षीय सारंग भांड कंपनी और समूह कंपनियों के प्रमोटर हैं। उन्हें अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण इंजीनियरिंग परियोजनाओं के क्षेत्र में 16 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय के सिम्बायोसिस कॉलेज ऑफ आट्र्स एंड कॉमर्स से मार्केटिंग में विशेषज्ञता के साथ वाणिज्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है और ऑस्ट्रेलिया के चिफली बिजनेस स्कूल से प्रबंधन में स्नातकोत्तर प्रमाण-पत्र प्राप्त किया है। इसके अलावा उनके पास स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के स्टैनफोर्ड सेंटर फॉर प्रोफेशनल डेवलपमेंट से एडवांस्ड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के लिए प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी है। वह ऑर्गेनिक रीसाइक्लिंग सिस्टम्स की शुरुआत से ही इसमें शामिल हैं और भारत में ऊर्जा परियोजनाओं में एमएसडब्ल्यू को बढ़ावा देने के लिए ऑर्गेनिक रीसाइक्लिंग सिस्टम्स को शामिल करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे ऑर्गेनिक रीसाइक्लिंग सिस्टम्स के लिए नई परियोजनाओं को प्राप्त करने और विकसित करने के लिए रणनीति विकसित करने के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने सोलापुर परियोजना के लिए परियोजना विकास चरण का नेतृत्व किया है और कंपनी के लिए कई अन्य परियोजनाओं को सफलतापूर्वक सुरक्षित करने में कामयाब रहे हैं।
सीएसआईआर-आईआईपी से सहयोगी करार
वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद – भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (सीएसआईआर-आईआईपी) और ऑर्गेनिक रिसाइक्लिंग सिस्टम्स लिमिटेड (ओआरएसएल) के बीच सहयोग संपीड़ित बायोगैस प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। पेट्रोलियम शोधन और जैव ईंधन में अपनी विशेषज्ञता के लिए प्रसिद्ध एक प्रमुख शोध संस्थान सीएसआईआर-आईआईपी ने कच्चे बायोगैस को पाइपलाइन-गुणवत्ता वाले बायो-मीथेन में अपग्रेड करने के लिए अत्याधुनिक वैक्यूम स्विंग एडसोर्प्शन (वीएसए) तकनीक विकसित की है। अपशिष्ट प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों में अपने व्यापक अनुभव के साथ ओआरएसएल अपने सोलापुर संयंत्र में इस उन्नत तकनीक को लागू करने के लिए तैयार है। यह साझेदारी न केवल उच्च गुणवत्ता वाले संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) का उत्पादन करने की कंपनी की क्षमता को बढ़ाती है, बल्कि टिकाऊ ऊर्जा समाधानों की बढ़ती मांग को भी संबोधित करती है। सीएसआईआर-आईआईपी की वीएसए तकनीक को एकीकृत करके, सहयोग यह सुनिश्चित कर रहा है कि उत्पादित बायोगैस कड़े गुणवत्ता मानकों को पूरा करती है, जो औद्योगिक और वाहनों के उपयोग सहित विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त है। यह पहल पर्यावरणीय स्थिरता के लिए वैज्ञानिक प्रगति का लाभ उठाने तथा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नवीन, स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों संगठनों की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
लिस्टिंग के मायने
‘ऑर्गेनिक रीसाइक्लिंग सिस्टम्स लिमिटेड’ का आईपीओ बीएसई एसएमई प्लेटफार्म पर सूचीबद्ध हुआ है। कंपनी द्वारा 10 रुपए फेसवैल्यू के 2500200 शेयर 200 रुपए प्रति शेयर के भाव पर जारी कर 50 करोड़ रुपए जुटाए गए। कंपनी के आईपीओ का प्रबंधन प्रमुख लीड मैनेजर कंपनी अरिहंत कैपिटल मार्केट लिमिटेड द्वारा किया गया था। वर्तमान में कंपनी का शेयर 275.20 रुपए के भाव पर कारोबार कर रहा है। कंपनी ने 400 प्रति शेयर का उच्चतम स्तर छुआ है। शेयर बाजार में लिस्टिंग होने से कंपनी को राष्ट्रीय स्तर पर निवेशक समुदाय में पहचान मिली और रिटेल निवेशक भी कंपनी के साथ जुड़ें हैं।
नोट: कंपनी के शेयर में निवेश करने से पूर्व निवेशक पंजीकृत निवेश सलाहकारों की सलाह लेंवे, यह लेख निवेश सलाह नहीं है।नोट: कंपनी के शेयर में निवेश करने से पूर्व निवेशक पंजीकृत निवेश सलाहकारों की सलाह लेंवे, यह लेख निवेश सलाह नहीं है।

