बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। वर्तमान समय में निवेशक उच्च बाज़ार अस्थिरता, बढ़ती व्यापक आर्थिक अनिश्चितताओं, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और इक्विटी व कमोडिटी बाज़ारों में तेज़ हलचलों का सामना कर रहे हैं। ऐसे माहौल में केवल एक एसेट क्लास पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। यही वजह है कि संतुलित और सुविचारित निवेश रणनीति पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इस परिप्रेक्ष्य में ‘निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड’ जैसे मल्टी-एसेट फंड निवेशकों के लिए एक व्यवहारिक विकल्प के रूप में उभरते हैं।
एसेट एलोकेशन क्यों है ज़रूरी
एसेट एलोकेशन का मूल सिद्धांत यह है कि पूरी पूंजी को एक ही निवेश माध्यम में लगाने के बजाय, उसे इक्विटी, डेट, सोना और अन्य कमोडिटी जैसी विभिन्न एसेट श्रेणियों में बांटा जाए। इसका उद्देश्य रिटर्न को स्थिर बनाना और जोखिम को नियंत्रित करना होता है।
विभिन्न एसेट क्लास अलग-अलग बाज़ार चक्रों में अलग व्यवहार करती हैं। आर्थिक विस्तार के दौर में इक्विटी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, जबकि मंदी के समय डेट अपेक्षाकृत स्थिरता प्रदान करता है। वहीं, मुद्रास्फीति या वैश्विक अनिश्चितता के समय सोना और अन्य कमोडिटी अक्सर सुरक्षित निवेश के रूप में उभरती हैं। कम या नकारात्मक सहसंबंध वाली एसेट क्लास को एक साथ रखने से पोर्टफोलियो की समग्र अस्थिरता कम हो सकती है।
बाज़ार टाइमिंग के जोखिम से बचाव
बाज़ार का सही समय पकड़ना—कम दाम पर खरीदना और ऊंचे स्तर पर बेचना—पेशेवर निवेशकों के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है। मल्टी-एसेट एलोकेशन इस समस्या को कम करता है क्योंकि निवेश अलग-अलग समय पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली एसेट क्लास में पहले से फैला होता है, जिससे सटीक टाइमिंग की आवश्यकता घट जाती है।
बदलते बाज़ार में बढ़ती प्रासंगिकता
2025 और 2026 की शुरुआत में वैश्विक मैक्रो बदलावों के कारण इक्विटी बाज़ारों में अस्थिरता देखने को मिली, जबकि सोना और चांदी जैसी कमोडिटी में तेज़ उछाल दर्ज किया गया। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने बॉन्ड वैल्यूएशन को भी प्रभावित किया। ऐसे वातावरण में केवल इक्विटी आधारित रणनीति अप्रत्याशित साबित हो सकती है। यहीं पर मल्टी-एसेट फंड्स की उपयोगिता स्पष्ट होती है, जो जोखिम और रिटर्न को विभिन्न एसेट क्लास में फैलाकर संतुलन बनाते हैं।
निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड की संरचना
निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड एक ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड है, जो एक ही पोर्टफोलियो में कई एसेट क्लास में निवेश करता है। इसमें प्रमुख रूप से इक्विटी, डेट और कमोडिटी (गोल्ड एवं सिल्वर ईटीएफ के माध्यम से) के साथ-साथ मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में भी निवेश किया जाता है। फंड का उद्देश्य दीर्घकालिक पूंजी वृद्धि के साथ संतुलित जोखिम प्रबंधन है।
यह फंड 28 अगस्त 2020 को लॉन्च किया गया था। वर्तमान में इसके पोर्टफोलियो में लगभग 60 प्रतिशत इक्विटी, करीब 18 प्रतिशत डेट, जबकि शेष निवेश सोना, कमोडिटी और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में किया गया है। समकक्ष फंडों की तुलना में इसने एक-वर्षीय और बहुवर्षीय अवधि में मजबूत प्रदर्शन किया है, जहां डायरेक्ट प्लान में वार्षिक रिटर्न 20 प्रतिशत से अधिक रहा है।
फंड की प्रमुख विशेषताएं
फंड की सबसे बड़ी ताकत इसका अंतर्निहित विविधीकरण है, जो इक्विटी से विकास की संभावना, डेट से स्थिर आय और कमोडिटी से अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। विभिन्न एसेट क्लास की अलग-अलग प्रतिक्रिया के कारण, इक्विटी में गिरावट को डेट या सोने से आंशिक रूप से संतुलित किया जा सकता है, जिससे पोर्टफोलियो में तेज़ गिरावट का जोखिम कम होता है।
ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि यह फंड न केवल प्रतिस्पर्धी रिटर्न देने में सक्षम रहा है, बल्कि अस्थिर दौर में नुकसान को नियंत्रित करने में भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करता आया है। इसके अलावा, निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो प्रबंधन भी सरल हो जाता है, क्योंकि अलग-अलग एसेट क्लास में मैन्युअल री-बैलेंसिंग की आवश्यकता कम हो जाती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, मौजूदा बाज़ार परिदृश्य—जहां अस्थिरता, वैश्विक अनिश्चितता और एसेट क्लास में तेज़ उतार-चढ़ाव बना हुआ है—में निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड जैसे उत्पाद संतुलित और जोखिम-प्रबंधित निवेश रणनीति के लिए उपयुक्त नजर आते हैं। विभिन्न एसेट क्लास में निवेश फैलाकर यह फंड नकारात्मक जोखिम को सीमित करने, बाज़ार उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने और दीर्घकालिक धन सृजन का अवसर प्रदान करने का प्रयास करता है। मध्यम जोखिम के साथ लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक आकर्षक विकल्प हो सकता है।
नोट: निवेश से पहले निवेशकों को पंजीकृत निवेश सलाहकार से परामर्श लेना चाहिए। यह लेख निवेश सलाह नहीं है।

