1 फरवरी से सरकार सिगरेट, तंबाकू उत्पाद और पान मसाला पर नया कर ढांचा लागू कर रही है। इसका उद्देश्य इन उत्पादों पर कड़े नियम लागू करना और कर स्तर को ऊँचा बनाए रखना है। सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगेगी, साथ ही पान मसाला पर नया हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सैस लागू होगा। ये नई ड्यूटी पहले की प्रणाली को बदल देगी, जिसमें इन उत्पादों पर 28 प्रतिशत GST और कम्पेंसेशन सैस लगाया जाता था, जो GST के लागू होने के बाद जुलाई 2017 से लागू था।
सरकार कई तंबाकू उत्पादों जैसे चुइंग तंबाकू, फ़िल्टर खैनी, ज़र्दा और गुटखा के लिए MRP आधारित मूल्यांकन प्रणाली भी लागू कर रही है। इस प्रणाली के अनुसार GST अब फैक्ट्री मूल्य के बजाय पैकेट पर छपे रिटेल मूल्य के आधार पर गणना किया जाएगा। इस कदम से कर चोरी कम होने और राजस्व संग्रह में सुधार की उम्मीद है। पान मसाला निर्माताओं को अब नए हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सैस कानून के तहत 1 फरवरी से नया पंजीकरण कराना होगा। उन्हें अपने सभी पैकिंग मशीनों पर CCTV कैमरे लगाने होंगे और वीडियो रिकॉर्डिंग कम से कम दो साल तक संग्रहित करनी होगी।
इसके अलावा, कंपनियों को एक्साइज अधिकारियों को अपनी फैक्ट्रियों में मशीनों की संख्या और उत्पादन क्षमता की जानकारी देनी होगी। यदि कोई मशीन लगातार 15 दिन तक काम नहीं करती है, तो निर्माता उस अवधि के लिए एक्साइज ड्यूटी में छूट का दावा कर सकेंगे। नए बदलावों के बावजूद, सरकार ने सुनिश्चित किया है कि पान मसाला पर कुल कर बोझ, जिसमें 40 प्रतिशत GST शामिल है, लगभग वर्तमान स्तर 88 प्रतिशत के आसपास ही रहेगा।

