बिजऩेस रेमेडीज/जयपुर
23 वर्षों से प्राथमिक नि:संतानता से प्रभावित होने और IUI में कई बार असफलता मिलने के बाद जटिल परिस्थितियों के बावजूद एक 41 वर्षीय सविता (बदला हुआ नाम) को इन्दिरा आईवीएफ जयपुर में उपचार करवाने के बाद सफलतापूर्वक गर्भधारण हुआ है। थिन एंडोमेट्रियम और ट्यूबल फैक्टर इनफर्टिलिटी (हाइड्रोसा-लपिंक्स) होने के कारण महिला नि:संतानता का सामना कर रही थी। कठिन चुनौतियों के बावजूद दम्पती का माता-पिता बनने का सपना उचित फर्टिलिटी देखभाल और नवीन अप्रोच के माध्यम से पूरा हुआ।
मरीज की मेडिकल हिस्ट्री में कई हिस्टेरोस्कोपिक कैविटी वृद्धि की प्रक्रियाओं के बाद भी एंडोमेट्रियम (केवल 4-5 मिमी) काफी पतली पायी गयी। उचित जांचों में दोनों फैलोपियन ट्यूबों में हाइड्रोसालपिंक्स भी सामने आया यह एक ऐसी स्थिति है जो भ्रूण प्रत्यारोपण में बाधा उत्पन्न कर सकती है। इन कारकों ने शून्य अण्डों की स्थिति के साथ प्राकृतिक गर्भधारण या पारंपरिक फर्टिलिटी उपचारों को असफल कर दिया।
डॉ. दीपिका गुरनानी के नेतृत्व में इंदिरा आईवीएफ की टीम ने दम्पती की लंबे समय से चली आ रही फर्टिलिटी चुनौतियों के समाधान के लिए एक व्यापक उपचार योजना बनायी। फैलोपियन ट्यूब में रुकावटों को दूर करने के लिए एक प्रक्रिया की गई, इसके बाद गर्भाशय की परत की मोटाई में सुधार लाने के उद्देश्य से उपचार किया गया, जो एक सफल गर्भधारण के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। प्रारंभिक कठिनाइयों के बावजूद भू्रण स्थानांतरण के लिए लाइनिंग में पर्याप्त सुधार हुआ। डोनर अंडे का उपयोग करके एक स्वस्थ भ्रूण प्रत्यारोपित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव रहा और बिना किसी समस्या के स्वस्थ गर्भावस्था जारी है।

