Wednesday, July 15, 2026 |
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खाने-पीने और रोजाना जरूरत के सामान फिर महंगे

by Business Remedies
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नई दिल्ली/बीआर न्यूज नेटवर्क। भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई या थोक महंगाई दर जून में सालाना आधार पर 9.87 प्रतिशत रही है, जो कि मई में 9.68 प्रतिशत थी। वहीं ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में 27 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। जून में महंगाई 44 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर, 2022 में ये 10.70 फीसदी पर पहुंच गई थी। वहीं रिटेल महंगाई भी छह महीने से लगातार बढ़ रही है। रिटेल महंगाई भी लगातार छठे महीने बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों में दी गई। महंगाई बढ़ने की वजह रोजमर्रा की जरूरत के सामान और खाने-पीने की चीजों का महंगा होना है। अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी से चल रहा तनाव कम नहीं हुआ, तो इसके दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे पहले गत दिनों ही रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी हुए थे। सरकारी आंकड़ों में बताया गया कि WPI की तीन मुख्य घटक प्राइमरी आर्टिकल्स, फ्यूल एवं एनर्जी और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स में जून में थोक महंगाई दर क्रमश: 7 प्रतिशत, 27.41 प्रतिशत और 7.48 प्रतिशत थी, जो कि मई में क्रमश: 4.99 प्रतिशत, 30.33 प्रतिशत और 7.48 प्रतिशत थी।

प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई 7 फीसदी बढ़ी

प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई 4.99 फीसदी से बढ़कर 7 फीसदी हो गई है। खाने-पीने की चीजों की महंगाई 4.49 फीसदी से बढ़कर 6.14 फीसदी पर पहुंच गई है। फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर 30.33 फीसदी से घटकर 27.41 फीसदी हो गई है। वहीं मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई में कोई बदलाव नहीं है, यह 7.48 फीसदी रही।

रिटेल महंगाई भी 4.38 फीसदी बढ़ी

आलू-अदरक समेत खाने-पीने की चीजों के दाम फिर बढ़ने से रिटेल महंगाई लगातार छठे महीने बढ़ी है। जून में यह 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। जनवरी में यह 2.74 फीसदी थी। वहीं एक महीने पहले मई में 3.93 फीसदी थी।

प्रोडक्टिव सेक्टर पर पड़ता बुरा असर

थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है। जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है।

रिटेल स्तर पर इन वस्तुओं में हुई वृद्धि

गेंहू का आटा, चावल, दालें-अरहर, उड़द, मूंग आदि, दूध और दुग्ध उत्पाद, खाद्य तेल, फल, हरी सब्जियां-टमाटर, अदरक आदि, मसाले, चाय और कॉफी, पैक्ड खाद्य पदार्थ, LPG, पेट्रोल और डीजल के असर से परिवहन खर्च तथा सोना और आभूषण।



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