नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच मई में भारत की निजी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। HSBC Flash India PMI Composite Output Index मई में घटकर 58.1पर पहुंच गया, जबकि अप्रैल में यह 58.2 था। हालांकि यह आंकड़ा अभी भी निजी क्षेत्र की गतिविधियों में मजबूत बढ़त का संकेत देता है।
ताजा PMI Data के अनुसार सेवा क्षेत्र में वृद्धि तेज हुई, लेकिन फैक्ट्री उत्पादन की रफ्तार कमजोर पड़ने से कुल वृद्धि पर असर पड़ा। विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि दर धीमी हुई है। वहीं निर्यात ऑर्डर में भी नरमी देखने को मिली है। HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि विनिर्माण गतिविधियों में मामूली नरमी आई है। उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि दर कम हुई है, जबकि नए निर्यात ऑर्डर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद Manufacturing PMI अपने दीर्घकालिक औसत के आसपास बना हुआ है, जिसे लगातार बढ़ते भंडारण का समर्थन मिला।
रिपोर्ट के मुताबिक तैयार माल का भंडार लगातार दूसरे महीने बढ़ा है। वहीं खरीद स्टॉक में पिछले तीन महीनों की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। कच्चे माल की लागत बढ़ने से कंपनियों पर लागत का दबाव भी बढ़ा है। इनपुट कीमतों में जुलाई 2022 के बाद सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि कंपनियों ने बढ़ती लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला। सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने विनिर्माण कंपनियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया और उन पर महंगाई का दबाव भी अपेक्षाकृत कम रहा। PMI Data के अनुसार मई में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र दोनों में नए कारोबार की वृद्धि दर धीमी रही, जिससे समग्र स्तर पर वृद्धि प्रभावित हुई। निजी क्षेत्र में नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि पिछले19महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बिक्री के मामले में वस्तु उत्पादक कंपनियों ने सितंबर 2024 के बाद दूसरी सबसे धीमी वृद्धि दर्ज की। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय कंपनियों पर भी दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद कारोबारी भरोसा मजबूत बना हुआ है। मई में सकारात्मक कारोबारी भावना दीर्घकालिक औसत से ऊपर रही, हालांकि यह तीन महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई। कंपनियों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में बाजार की स्थिति बेहतर होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण रणनीति, बेहतर मार्केटिंग प्रयास और मांग में सुधार की उम्मीद ने कारोबारी विश्वास को समर्थन दिया है। वहीं HSBC Flash India Manufacturing PMI अप्रैल के 54.7 से घटकर मई में 54.3 पर आ गया। यह करीब चार वर्षों में क्षेत्र की सेहत में दूसरी सबसे कमजोर सुधार दर मानी जा रही है।

