भारत में बढ़ते तापमान और संभावित अल नीनो प्रभाव के चलते वित्त वर्ष 2027 में बिजली की मांग में 7 प्रतिशत तक वृद्धि होने का अनुमान है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार देश की कुल बिजली मांग बढ़कर लगभग 1,810 से 1,830 अरब यूनिट तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक गर्मी और कम वर्षा के कारण घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों में शीतलन संबंधी आवश्यकताएं बढ़ेंगी, जिससे बिजली की खपत में उल्लेखनीय इजाफा होगा।
रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में बिजली की मांग मौसम पर अत्यधिक निर्भर रहने की संभावना है। मई माह में देश के उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी, पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में तापमान सामान्य से 1 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। इसी कारण मई में बिजली की मांग सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत बढ़कर 165 अरब यूनिट तक पहुंच गई। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में 12 मई को तापमान 48.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो देश के सबसे अधिक तापमान वाले क्षेत्रों में शामिल रहा। अप्रैल-मई अवधि के दौरान बिजली की मांग में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1.2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी।
देश में अधिकतम बिजली मांग मई माह में 271 गीगावाट तक पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष के 245 गीगावाट के उच्चतम स्तर से लगभग 10 प्रतिशत अधिक रही। यह आंकड़ा बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक गतिविधियों में तेजी को दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि औद्योगिक गतिविधियों में सुधार देखने को मिला है। विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक अप्रैल के 54.7 से बढ़कर मई में 55 पर पहुंच गया। औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता देश की कुल बिजली मांग का लगभग आधा हिस्सा रखते हैं, इसलिए इस क्षेत्र की गतिविधियों का बिजली खपत पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
बिजली व्यापार बाजार में भी तेजी दर्ज की गई। मई में रियल-टाइम बाजार का कारोबार सालाना आधार पर लगभग 16 प्रतिशत बढ़कर 5,529 मिलियन यूनिट हो गया। वहीं औसत बाजार समाशोधन मूल्य बढ़कर ₹.4.16 प्रति यूनिट पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार डे-अहेड बाजार में औसत समाशोधन मूल्य 18.3 प्रतिशत बढ़कर ₹.4.80 प्रति यूनिट दर्ज किया गया। इससे संकेत मिलता है कि बढ़ती मांग के कारण बिजली की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है।
मई के दौरान देश में कुल बिजली उत्पादन लगभग 12 प्रतिशत बढ़कर 178 अरब यूनिट पहुंच गया। अक्षय ऊर्जा उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कोयला आधारित उत्पादन में 12 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसके बावजूद कुल बिजली उत्पादन में कोयला आधारित संयंत्रों की हिस्सेदारी 68 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में भारत ने लघु जलविद्युत परियोजनाओं सहित 7.4 गीगावाट नई अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है। यह स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में देश की बढ़ती निवेश गतिविधियों को दर्शाता है। दूसरी ओर ताप विद्युत संयंत्रों में कोयला भंडार में कमी दर्ज की गई है। मई के अंत तक कोयला भंडार घटकर 4.9 करोड़ टन रह गया, जबकि एक वर्ष पहले यह 6 करोड़ टन था। इसी अवधि में कोयला भंडारण स्तर 21 दिनों से घटकर 16 दिनों पर आ गया। बिजली मांग में वृद्धि के कारण प्रतिदिन कोयले की आवश्यकता बढ़ने से भंडार पर दबाव देखा जा रहा है।

