सरकार ने जारी किया स्पष्टीकरण
केंद्र सरकार ने IDBI Bank में अपनी Shareholding से जुड़े 2003 के Legislative Developments पर शनिवार को स्पष्टीकरण जारी किया। Finance Ministry ने कहा कि IDBI (Repeal) Act, 2003 की Legislative History, Delhi High Court का फैसला और अलग-अलग Union Budget भाषण मिलकर IDBI Bank के Strategic Disinvestment को लेकर सरकार की नीति के विकास को स्पष्ट करते हैं।
2003 में संशोधन हुआ था खारिज
Ministry के अनुसार Union Budget 2003 और IDBI (Repeal) Act, 2003 पर Parliamentary Debate के दौरान सरकार की हिस्सेदारी घटाने पर रोक लगाने के लिए एक Amendment प्रस्तावित किया गया था। हालांकि यह Amendment स्वीकार नहीं हुआ और अंतिम कानून का हिस्सा नहीं बना।
Delhi High Court के फैसले का हवाला
सरकार ने All India IDBI Officers’ Association vs Union of India मामले में Delhi High Court के 17 December 2018 के फैसले का भी उल्लेख किया। Court ने कहा था कि Parliamentary Debate में दिए गए बयानों के आधार पर Government को IDBI Bank में अपनी हिस्सेदारी घटाने से नहीं रोका जा सकता।
कानून में हिस्सेदारी घटाने पर प्रतिबंध नहीं
Delhi High Court ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि IDBI Repeal Act, 2003 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो Government को IDBI Ltd में अपनी Stake कम करने या बेचने से रोकता हो। Court ने Promissory Estoppel के सिद्धांत को भी इस मामले में लागू नहीं माना।
Budget भाषणों में भी दिखी Disinvestment Policy
Finance Ministry ने Union Budget 2016–17 का भी हवाला दिया, जिसमें तत्कालीन Finance Minister Arun Jaitley ने Government Stake को 50% से नीचे लाने के विकल्प पर विचार करने की बात कही थी। वहीं Union Budget 2021–22 में तत्कालीन Finance Minister Nirmala Sitharaman ने IDBI Bank को Strategic Disinvestment वाली प्रमुख सरकारी कंपनियों और संस्थानों में शामिल किया था।

