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ICICI Lombard की प्रीमियम ग्रोथ तीसरी तिमाही में 13% बढ़कर 70,000 करोड़ के करीब

by Business Remedies
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ICICI Lombard Q3 Result : चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में ICICI Lombard की ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम (GDPI) सालाना आधार पर 213.72 अरब रुपये रही। एक साल पहले इसी अवधि के 206.23 अरब रुपये के मुकाबले 3.6% की बढ़त है। हालांकि, इस दौरान पूरे इंश्योरेंस इंडस्ट्री की ग्रोथ 8.7% रही, यानी कंपनी की रफ्तार इंडस्ट्री औसत से धीमी रही। अगर फसल बीमा और मास हेल्थ सेगमेंट को हटा दें, तो सालाना आधार पर कंपनी की GDPI ग्रोथ 7.5% रही। इसके मुकाबले इसी अवधि में इंडस्ट्री की ग्रोथ 13.3% रही। यानी चुनिंदा सेगमेंट्स में कंपनी ने ग्रोथ दर्ज की, लेकिन वहां भी इंडस्ट्री के मुकाबले दबाव साफ नजर आया।

o तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कंपनी की ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम (GDPI) सालाना आधार पर बढ़कर 70.41 अरब रुपये हो गई। पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) में यह आंकड़ा 62.14 अरब रुपये था। यानी सालाना आधार पर कंपनी ने 13.3% की अच्छी ग्रोथ दर्ज की, जो इस दौरान पूरी इंश्योरेंस इंडस्ट्री की 11.5% ग्रोथ से भी बेहतर रही। हालांकि अगर फसल बीमा और मास हेल्थ सेगमेंट को अलग कर दें, तो कंपनी की GDPI ग्रोथ सालाना आधार पर 16.4% रही। इसके मुकाबले Q3 FY26 में इंडस्ट्री की ग्रोथ 20.1% रही। यानी चुनिंदा सेगमेंट्स में कंपनी की रफ्तार अच्छी रही, लेकिन फिर भी इंडस्ट्री औसत से थोड़ी पीछे नजर आई।

· FY26 के पहले नौ महीनों में कंपनी का कंबाइंड रेशियो सालाना आधार पर बढ़कर 104.2% हो गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि (9M FY25) में यह 102.9% था। वहीं 1/n आधार पर देखें तो 9M FY26 में कंबाइंड रेशियो 103.1% रहा, जो 9M FY25 के 102.8% से थोड़ा ज्यादा है। इसका सीधा मतलब है कि खर्च और क्लेम का दबाव पिछले साल के मुकाबले कुछ बढ़ा है।

o तीसरी तिमाही (Q3 FY26) की बात करें तो यहां भी यही रुझान दिखता है। Q3 FY26 में 1/n आधार पर कंबाइंड रेशियो 104.5% रहा, जबकि Q3 FY25 में यह 102.7% था। n आधार पर यह रेशियो Q3 FY26 में 103.1% और पिछले साल इसी तिमाही में 102.3% रहा।

o अगर प्राकृतिक आपदाओं से हुए बड़े नुकसान (CAT losses) के असर को अलग कर दें, तो तस्वीर थोड़ी साफ हो जाती है। 9M FY26 में 0.84 अरब रुपये और 9M FY25 में 0.94 अरब रुपये के प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान को हटाने के बाद, 1/n आधार पर कंबाइंड रेशियो क्रमशः 103.7% और 102.9% रहा।

o वहीं Q3 FY26 में 0.11 अरब रुपये के प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान को हटाने के बाद कंबाइंड रेशियो 104.3% रहा। गौर करने वाली बात यह है कि Q3 FY25 में किसी भी तरह का प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान नहीं था।

सोशल सिक्योरिटी कोड का असर

21 नवंबर 2025 से कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 लागू होने के बाद, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कंपनी पर करीब 0.55 अरब रुपये का अतिरिक्त वित्तीय असर पड़ा। अगर इस असर को अलग कर दें, तो सालाना आधार पर कंबाइंड ऑपरेटिंग रेशियो (CoR) वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में 103.9% और तीसरी तिमाही में 103.5% रहता। वहीं समायोजित आधार पर देखें तो CoR पहले नौ महीनों में 102.8% और Q3 में 102.2% होता।

· टैक्स से पहले मुनाफा (PBT) सालाना आधार पर देखें तो वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) 10.8% बढ़कर 29.41 अरब रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 26.53 अरब रुपये था।

o हालांकि तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर PBT में गिरावट दर्ज की गई। Q3 FY26 में PBT 9.4% घटकर 8.70 अरब रुपये रह गया, जो Q3 FY25 में 9.60 अरब रुपये था।

o कैपिटल गेन से मिला सहारा। सालाना आधार पर निवेश से होने वाली कमाई यानी कैपिटल गेन में मजबूती देखने को मिली। वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में यह बढ़कर 9.33 अरब रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 7.96 अरब रुपये था। वहीं Q3 FY26 में कैपिटल गेन 3.17 अरब रुपये रहा, जो Q3 FY25 के 2.76 अरब रुपये से ज्यादा है।

o टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) इन तमाम कारकों के चलते सालाना आधार पर कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में 11.3% बढ़कर 22.25 अरब रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 19.99 अरब रुपये था। वहीं समायोजित आधार पर PAT 13.8% बढ़कर 22.22 अरब रुपये रहा। अगर वेज कोड के असर को अलग कर दिया जाए, तो 9M FY26 का PAT 22.67 अरब रुपये रहता।

o वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) में कंपनी का मुनाफा (PAT) सालाना आधार पर घटकर 6.59 अरब रुपये रह गया, जो एक साल पहले 7.24 अरब रुपये था। हालांकि n आधार पर PAT 6.79 अरब रुपये से बढ़कर 6.80 अरब रुपये हो गया।

· FY26 के पहले नौ महीनों में कंपनी का रिटर्न ऑन एवरेज इक्विटी (ROAE) सालाना आधार पर घटकर 19.5% रह गया। हालांकि वेज कोड का असर हटाने पर ROAE 19.8% रहता।

o Q3 FY26 में ROAE सालाना आधार पर घटकर 16.5% रह गया, जबकि Q3 FY25 में यह 21.5% था। वेज कोड के असर को हटाने पर Q3 FY26 में ROAE 17.5% रहता।

· 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी का सॉल्वेंसी रेशियो 2.69 गुना रहा, जो नियामकीय न्यूनतम सीमा 1.50 गुना से काफी ऊपर है। इससे साफ है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है।



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