मुंबई,
वैश्विक संस्थागत निवेशक वर्ष 2026 में वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में 144 Billion Dollar का निवेश करने की तैयारी में हैं। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, निवेश गतिविधियों में स्पष्ट सुधार दिखाई दे रहा है और भारत वैश्विक पूंजी के लिए तेजी से महत्वपूर्ण गंतव्य बनता जा रहा है। निवेशक भारत को बड़े पैमाने, स्थिर आय और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं के कारण आकर्षक बाजार मान रहे हैं।
Knight Frank की Latest ‘Active Capital Survey’ रिपोर्ट में बताया गया कि प्रबंधनाधीन संपत्ति के आधार पर 87 प्रतिशत निवेशक वर्ष 2026 में प्रत्यक्ष वाणिज्यिक रियल एस्टेट निवेश बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। वहीं 62 प्रतिशत निवेशकों ने शुद्ध खरीदार बनने की मंशा जताई है, जो वैश्विक स्तर पर मजबूत अधिग्रहण रुचि को दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों की वापसी इस बार अधिक अनुशासित रणनीति के साथ हो रही है। वैश्विक स्तर पर Core और Core-Plus रणनीतियों पर नया ध्यान केंद्रित हुआ है और लगभग 37 Billion Dollar का नियोजित निवेश Core परिसंपत्तियों पर केंद्रित रहेगा।
Knight Frank India के Chairman और Managing Director शिशिर बैजल ने कहा कि वैश्विक पूंजी की वापसी हो रही है, लेकिन यह पहले की तुलना में अधिक सतर्क और संतुलित है। उनके अनुसार, भारत को अब एक रक्षात्मक विकास बाजार के रूप में देखा जा रहा है, जहां मजबूत मांग, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और दीर्घकालिक संरचनात्मक कारक निवेश को समर्थन दे रहे हैं। यह बदलाव भारत के वाणिज्यिक रियल एस्टेट बाजार में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली-NCR, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में ग्रेड ए कार्यालय परिसंपत्तियों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर कार्यालय परिसंपत्तियां फिर से सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बनी हैं। वर्ष 2026 में 69 प्रतिशत निवेशक कार्यालय क्षेत्र में निवेश की योजना बना रहे हैं। हालांकि निवेशक अब अधिक चयनात्मक हो गए हैं और वे बेहतर स्थान, पर्यावरण मानकों के अनुरूप तथा आधुनिक कार्यस्थल आवश्यकताओं को पूरा करने वाली परिसंपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
भारत में भी लीजिंग गतिविधियों को Global Capability Centres, प्रौद्योगिकी कंपनियों और घरेलू कॉरपोरेट्स से मजबूत समर्थन मिल रहा है। ये तीनों मिलकर लगभग 75 प्रतिशत मांग का योगदान दे रहे हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले कार्यालय स्टॉक पर विश्वास और मजबूत हुआ है। कार्यालय क्षेत्र के अलावा आवासीय किराया और छात्र आवास जैसे लिविंग सेक्टर भी वैश्विक स्तर पर निवेशकों की प्राथमिकता बन रहे हैं। लगभग 65 प्रतिशत निवेशक इन क्षेत्रों में निवेश की योजना बना रहे हैं, क्योंकि ये स्थिर आय और जनसांख्यिकीय लाभ प्रदान करते हैं। भारत में यह क्षेत्र अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन तेज शहरीकरण और युवा आबादी के कारण मध्यम और दीर्घकाल में इसमें बड़ी संभावनाएं देखी जा रही हैं।
रिटेल क्षेत्र में भी निवेशकों की रुचि फिर से बढ़ी है। लगभग 56 प्रतिशत निवेशक प्रमुख और अनुभव आधारित शॉपिंग सेंटर में निवेश की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा डेटा सेंटर, इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर जैसे परिचालन रियल एस्टेट क्षेत्रों में भी वैश्विक स्तर पर निवेश बढ़ रहा है। भारत में डिजिटल अपनाने की गति, स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा निवेश इन क्षेत्रों को नई गति दे रहे हैं। कुल मिलाकर, रिपोर्ट संकेत देती है कि वर्ष 2026 में वैश्विक पूंजी का प्रवाह वाणिज्यिक रियल एस्टेट में मजबूत रहेगा और भारत इस निवेश चक्र में प्रमुख भूमिका निभा सकता है।

