दिवाली के बाद अधिकांश राज्यों में हवा जहरीली हो गई है। जहां दिवाली पर चलने वाली आतिशबाजी और गाडिय़ों से उठने वाले धुएं से पर्यावरण पूरी तरह से प्रदूषित हो गया है। दिल्ली, राजस्थान सहित यूपी व महाराष्ट्र में हवा जहरीली हो गई है। इस साल दिवाली के बाद वायु प्रदूषण अपने चरम पर रहा। दिल्ली में तो एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 से ऊपर बना हुआ है और कुछ इलाकों में तो यह 400 को भी पार कर गया है। यह खतरनाक स्तर पटाखों के धुएं, गाडिय़ों के एग्जॉस्ट और मौसम का मिलाजुला असर है। इस प्रदूषण का सीधा असर हमारी आंखों पर पड़ रहा है, जिससे जलन, खुजली और धुंधलापन जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। इससे बच्चों और बुजुर्गों को इससे सबसे ज्यादा खतरा बना हुआ है। दिवाली के बाद जब प्रदूषण अपने चरम पर होता है, तो आंखों को इन समस्याओं से बचाने के लिए कुछ सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है।
खासकर बच्चों और बुजुर्गों को बाहर कम से कम निकलने दें। जब हवा में प्रदूषण ज्यादा हो, तो खिडक़ी-दरवाजे बंद रखें और अगर संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। रैप-अराउंड चश्मे पहनने से प्रदूषित कण सीधे आंखों के संपर्क में आने से बचेंगे। आंखों में जलन और सूखापन महसूस होने पर, प्रिजर्वेटिव-फ्री लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें। पटाखों से निकलने वाले बारीक कण और जहरीले पदार्थ हवा में मिलकर आंखों की सतह पर जम जाते हैं।
इससे आंखों की नमी बदल जाती है, जिससे आंखों में जलन, खुजली और लालिमा होने लगती है। कभी-कभी तो नजर भी धुंधली हो जाती है। यह प्रदूषण एलर्जी और सूजन को भी बढ़ा सकता है। दिवाली के बाद के दो हफ्ते बच्चों के लिए खास तौर पर चिंताजनक होते हैं। बच्चे हवा प्रदूषण के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनके फेफड़े और इम्यून सिस्टम अभी विकसित हो रहे होते हैं। इसके अलावा बच्चे छुट्टियों में अक्सर बाहर खेलते हैं और प्रदूषण से बचाव के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते। बुजुर्गों में आंसू बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और आंखों की समग्र स्थिति भी कमजोर हो जाती है, जिससे वे जलन के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। सूखी आंखें ग्लूकोमा और आंखों की उम्र से संबंधित अन्य सूजन जैसी समस्याएं इस खतरे को और बढ़ा देती हैं। दिवाली के बाद हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट आती है, जिससे सांस की समस्याओं के अलावा अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा होती हैं।




