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मानसून के शुभ संकेत, किसान सोच समझ कर करें बुवाई

by Business Remedies
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इस बार मौसम विभाग की भविष्यवाणी देश के किसानों के लिए शुभ संकेत लेकर आ रही है। अगर किसान सोच समझकर फसल की बुवाई करेंगे, तो निश्चित रूप से उन्हें पहले से दोगुना लाभ मिल सकेगा। जहां मानसून से पहले ही किसान अपनी खरीफ की फसल के लिए तैयारी शुरू कर देते हैं। हालांकि, बदलते मौसम की वजह से किसानों को खामियाजा भी उठाना पड़ता है। कृषि विभाग का कहना है कि इस बार बारिश अच्छी होने वाली है। ऐसे में किसानों को सोयाबीन, मूंगफली और मक्के की फसल की बुआई करनी चाहिए। किसान अपने खेत में फसल पानी को देख कर ही लगाता है। अगर कम बारिश होती है तो किसानों को उड़द, मूंग, तिल और ग्वार की फसल की बुवाई करनी चाहिए। किसानों द्वारा ज्यादातर सोयाबीन की फसल लगाई जाती है। सोयाबीन का मार्केट में रेट भी बढिय़ा है। इस फसल का रिटर्न भी काफी अच्छा मिलता है। ऐसे में सोयाबीन की फसल किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी। वहीं देश के पश्चिमी और मध्यवर्ती इलाकों के मुख्य वर्षा आधारित क्षेत्रों में अच्छी बारिश से दलहन और तिलहन की पैदावार को फायदा मिल सकता है और दालों के महंगे आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। यह कहा जा सकता है कि इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून अच्छा रहने और वर्षा का बेहतर रहने से खरीफ फसलों का उत्पादन बढ़ सकता है और रबी फसल के लिए मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में नमी भी रहेगी। मौसम विभाग ने कहा है कि इस वर्ष पूर्वोत्तर और बिहार के कुछ हिस्सों को छोडक़र देश के लगभग सभी क्षेत्रों में मानसूनी बारिश सामान्य से अधिक रहेगी। अलनीनो के तटस्थ रहने से मानसून के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष केवल अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में ही सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। जून से सितंबर के दौरान, मानसून की अवधि में औसत बारिश 87 सेंटीमीटर के दीर्घकालिक औसत का 105 प्रतिशत होने का अनुमान है।



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