भारत में त्योहार केवल धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी प्रेम और खुशियां बांटने के अवसर भी हैं। दीपावली, रक्षाबंधन, होली और अन्य पर्वों पर मिठाइयों, नमकीन, दूध, घी, तेल तथा विभिन्न खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसी बढ़ती मांग का लाभ उठाकर कुछ असामाजिक तत्व अधिक मुनाफा कमाने के लिए खाद्य पदार्थों में मिलावट का सहारा लेते हैं। ऐसे में त्योहारों की खुशियों के बीच मिलावट का जहर लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन जाता है। इसलिए आमजन की सतर्कता और सरकार की सख्ती, दोनों समय की मांग हैं। त्योहारों पर सबसे अधिक मिलावट मावा, दूध और कृत्रिम रंगों से बनी आकर्षक मिठाइयों में होती है। उपभोक्ताओं को सबसे पहली सावधानी यह बरतनी चाहिए कि वे सस्ती और खुली मिठाइयां खरीदने से बचें। हमेशा विश्वसनीय और प्रमाणित दुकानों से ही खरीदारी करें और पैकेट पर एफएसएसएआई मार्क के साथ एक्सपायरी डेट अवश्य जांचें। आमजन को दूध, घी और मावे की घर पर ही बुनियादी जांच करने के तरीके सीखने चाहिए, जिससे असली और नकली की पहचान तुरंत की जा सके। चांदी के वर्क के नाम पर एल्युमिनियम का वर्क इस्तेमाल होता है, इसलिए ज्यादा चमकीली मिठाइयों से दूरी बनाएं। मिलावट के इस गोरखधंधे पर अंकुश लगाने के लिए केवल जनता की जागरूकता पर्याप्त नहीं है, सरकार की भूमिका अत्यंत निर्णायक है। खाद्य सुरक्षा विभाग को त्योहारी सीजन शुरू होने से काफी पहले ही सघन शुद्ध के लिए युद्ध जैसा जांच अभियान शुरू कर देना चाहिए। हर प्रमुख बाजार में मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन की तैनाती होनी चाहिए, जहां आम नागरिक तुरंत अपने खरीदे गए खाद्य पदार्थों की जांच करवा सकें। सरकार को एक सक्रिय टोल-फ्री हेल्पलाइन या ऐप भी जारी करना चाहिए, जहां नागरिक मिलावट की आशंका होने पर तुरंत और गोपनीय शिकायत दर्ज करा सकें। इसके अलावा मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और शीघ्र सजा का प्रावधान होना चाहिए। केवल सामान्य जुर्माना लगाकर छोडऩे की प्रथा से काम नहीं चलेगा। दोषियों के लाइसेंस रद्द करने और उन्हें जेल भेजने जैसी कड़ी कार्रवाई ही अपराधियों में खौफ पैदा कर सकती है।

