नई दिल्ली,
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को हल्की गिरावट देखी गई। यह नरमी तब आई जब अमेरिका ने 30 दिन की अस्थायी छूट देने की घोषणा की, जिसके तहत सभी देशों को रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी गई है। इस निर्णय से वैश्विक आपूर्ति को स्थिर रखने की कोशिश मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 0.47 प्रतिशत गिरकर 99.99 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल लगभग 0.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 95.09 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस कदम से वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कुछ हद तक कम हो सकती है।
अमेरिका के वित्त विभाग के प्रमुख स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर उपलब्ध आपूर्ति को बढ़ाने के लिए अमेरिकी वित्त विभाग ने अस्थायी अनुमति दी है, ताकि समुद्र में फंसे रूसी तेल को विभिन्न देश खरीद सकें। उनके अनुसार यह अनुमति सीमित अवधि और विशेष परिस्थितियों के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल उन तेल खेपों पर लागू होगा जो पहले से ही समुद्री मार्ग में हैं। इससे रूस सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा, क्योंकि उसकी ऊर्जा आय का अधिकांश हिस्सा उत्पादन स्थल पर लगाए जाने वाले कर से आता है। स्कॉट बेसेंट ने यह भी कहा कि तेल कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव अल्पकालिक व्यवधान है। हालांकि लंबे समय में इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय हितों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका की यह छूट उन रूसी मूल के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होगी, जिन्हें 12 March को पूर्वी डेलाइट समयानुसार रात 12 बजकर 01 मिनट से पहले जहाजों पर लादा गया है। इससे पहले बुधवार को अमेरिका ने अपने सामरिक पेट्रोलियम भंडार से 17.2 करोड़ बैरल तेल जारी करने की घोषणा भी की थी, ताकि वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सके और कीमतों को संतुलित किया जा सके। इधर भारत सरकार ने कहा है कि देश में कच्चे तेल की आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार के अनुसार वर्तमान में जितनी मात्रा में तेल की व्यवस्था की गई है, वह होरमुज जलडमरूमध्य मार्ग से मिलने वाली आपूर्ति से भी अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस संकट से पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा होरमुज मार्ग से होकर आता था। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में भारत ने अन्य स्रोतों से इतनी मात्रा सुनिश्चित कर ली है, जो इस मार्ग से मिलने वाली आपूर्ति से अधिक है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि अब होरमुज मार्ग के बाहर से कच्चे तेल की आपूर्ति लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि संघर्ष शुरू होने से पहले यह करीब 55 प्रतिशत थी। यह बदलाव भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति और विविध स्रोतों से खरीद की रणनीति का परिणाम है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत वर्तमान में लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है, जबकि वर्ष 2006-07 में यह संख्या केवल 27 थी। लगातार कई वर्षों की नीतियों के कारण ऊर्जा स्रोतों में यह विविधता विकसित हुई है, जिससे भारत के पास अन्य देशों की तुलना में अधिक विकल्प उपलब्ध हैं। मंत्री के अनुसार देश की तेल शोधन इकाइयां इस समय उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं। कई मामलों में उत्पादन क्षमता का उपयोग 100 प्रतिशत से भी अधिक हो रहा है, जिससे घरेलू ईंधन आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिल रही है।

