दुनिया भर के मेहनती और समर्पित लोगों को याद करने और मजदूरों के अधिकारों के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल यानि आज ही के दिन 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है। किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में मजदूरों, कामगारों और मेहनतकशों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। किसी भी उद्योग में कामयाबी के लिए मालिक, कामगार और सरकार अहम धड़े होते हैं। कामगारों के बिना कोई भी औद्योगिक ढांचा खड़ा नहीं रह सकता। जहां किसी देश की तरक्की कामगारों और किसानों पर ही निर्भर करती है। वहीं मजदूरोंं और किसानों की बड़ी संख्या का राज प्रबंध में बड़ा योगदान है। सरकार का रोल औद्योगिक शान्ति, उद्योगपतियों और मजदूरों दरमियान सुखदायक, शांतमयी और पारिवारिक संबंध कायम करना, झगड़े और टकराव की सूरत में उन का समझौता और सुलह करवाने का प्रबंध करना और उनके मसलों को औद्योगिक ट्रिब्यूनल कायम कर कर निरपेक्षता और पारदर्शी ढंग से न्याय के उसूल के सिद्धांत अनुसार इंसाफ प्रदान करना और उनकी बेहतरी के लिए समय -समय से कानूनी और विवरण प्रणाली निर्धारित करना है। मजदूर दिवस की शुरुआत 1 मई, 1886 से मानी जाती है, जब अमेरिका की मजदूर यूनियनों ने काम का समय 8 घंटे से अधिक न रखे जाने के लिए हड़ताल की थी। इस हड़ताल के समय शिकागो की हे मार्केट में बम धमाका हुआ था। यह बम किस ने फेंका किसी का कोई पता नहीं। इसके निष्कर्ष के तौर पर पुलिस ने श्रमिकों पर गोली चला दी और सात श्रमिक मार दिए। वहीं भारत में एक मई का दिवस सबसे पहले चैन्नई में 1 मई,1923 को मनाना शुरू किया था। इसकी शुरुआत भारती मजदूर किसान पार्टी के नेता कामरेड ने शुरू की थी। एक संकल्प के पास करके यह सहमति बनाई गई कि इस दिवस को भारत में भी कामगार दिवस के तौर पर और इनके हितों का पूरा ध्यान दिया जाए।




