Saturday, July 4, 2026 |
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भारतीय निर्यातक माल तय समय से पहले भेजने में जुटे

बंदरगाहों पर कार्गो शिप और कंटेनरों का लगा जमावड़ा

by Business Remedies
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रेसिप्रोकल टैरिफ से 90 दिन की राहत का प्रभाव

कुंजेश कुमार पतसारिया | बिजनेस रेमेडीज | जयपुर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को छोडक़र बाकी देशों को रेसिप्रोकल टैरिफ से 90 दिन की राहत दी है। ऐसे में भारतीय निर्यातक अपना माल तय समय से पहले भेजने की तैयारी में जुट गए हैं। निर्यातक इन स्थितियों हालातों से निपटने के लिए अमेरिकी एक्सपोर्ट ऑर्डर को तेजी से पूरे करने में लगे हुए हैं। बंदरगाहों पर कार्गो शिप और कंटेनरों का जमावड़ा लगा हुआ है। इसके अलावा भारतीय निर्यातक दूसरे देशों में अवसर खंगालने में भी जुट गए हैं। वहीं अभी निर्यातक10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ पर अपना माल इम्पोर्ट कर रहे है। वहीं ट्रंप ने टैरिफ वॉर में चीन, वियतनाम, कम्बोडिया और बांग्लादेश पर ज्यादा टैरिफ लगा है।

आर्थिक वृद्धि दर घटने के आसार
अमेरिका की ओर से व्यापार शुल्क अगले तीन महीनों (90 दिन बाद) में लागू हो जाते हैं, तो भारत की आर्थिक वृद्धि दर वर्ष, 2025 में घटकर 6.1 प्रतिशत रह सकती है। इससे पहले इसका अनुमान 6.4 प्रतिशत लगाया गया था।

टैरिफ से प्रभावित क्षेत्र
टैरिफ से सबसे ज़्यादा प्रभावित भारत के टेक्सटाइल, हैंडीक्राफ्ट, इलेक्ट्रॉनिक्स और रत्न एवं आभूषण क्षेत्र हैं। अमेरिका भारत से लगभग 14 बिलियन डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स और 9 बिलियन डॉलर से ज़्यादा मूल्य के रत्न एवं आभूषण आयात करता है, जिससे ये उद्योग विशेष रूप से कमजोर हो जाते हैं।

घरेलू मांग बनी रहेगी सहारा
भारत की अर्थव्यवस्था बाहरी मांग पर अपेक्षाकृत कम निर्भर है। इस कारण अमेरिका के शुल्क बढ़ोतरी का असर सीमित रहेगा। इसके अलावा रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती और बजट में दी गई कर राहत घरेलू मांग को समर्थन दे सकती है। पिछले दिनों ही आरबीआई ने लगातार दूसरी बार नीतिगत दर में कटौती करते हुए इसे 6 फीसदी कर दिया है।
अमेरिका के सप्लाई चेन से जुड़े देश होंगे अधिक प्रभावित एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से निर्यात पर निर्भर है। वे इस टैरिफ वॉर से सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इनमें कंबोडिया, वियतनाम,थाईलैंड और ताइवान जैसे देश शामिल हैं। इनकी सप्लाई चेन अमेरिका से जुड़ी है।

अभी तक यूएसए में हैंडिक्राफ्ट्स पर 0 फीसदी टैरिफ था किन्तु इसको बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया था। अब उसे घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। जो सामान जहाज पर 4 अप्रैल या उससे पहले लदान हो चुका है, उस पर 0 फीसदी टैरिफ ही लागू है। 90 दिन बाद टैरिफ दुबारा रिब्यू होगा। हमारी संस्था ईपीसीएच (श्वश्चष्द्ध) ने भारत सरकार के साथ मीटिंग भी की है। आशा है अगले 90 दिनों में इसका स्थायी हल निकल जाएगा। चीन पर 145 फीसदी ड्यूटी का भारत के निर्यात पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आने वाला समय भारतीय हैंडिक्राफ़्ट्स निर्यातकों के लिए उज्जवल है।
-रमाकांत जौहरी, ग्लोबल आर्ट एक्सपोर्ट, सीतापुरा, जयपुर

अमेरिकी सरकार की ओर से इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने से भारत के निर्यातकों पर शॉर्ट टर्म में तो असर पड़ेगा। वायर्स ने शिपमेंट को होल्ड करना भी शुरू कर दिया है। पर लॉन्ग टर्म में इसका फायदा निर्यातकों को मिलेगा। भारत में टैरिफ अन्य प्रतिस्पर्धी देशों चाइना, वियतनाम, कम्बोडिया और बांग्लादेश से बहुत कम है। भारत सरकार, ट्रंप सरकार से एफटीए पर भी बातचीत कर रही है,उसमें भी प्रोग्रेस चल रही है। इसके बाद ही असली फायदा निर्यातकों को मिल सकेगा। सरकार जल्दी से जल्दी इसे पूरा करे,ताकि राहत मिल सके। चाइना भी वर्ष,2002 से सुपर पॉवर बनने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि तब अमेरिका ने टैरिफ कम कर दिए थे। सभी के लिए बाजार खोल दिए थे। चाइना, यूएसए के बराबर खड़ा होने में जुटा रहा। इससे यूएसए की वैल्यू कम हो गई। ट्रंप सरकार ने चाइना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए टैरिफ में बढ़ोतरी कर उसे सुपर पॉवर बनने के प्रयास में जुट गया है।
-दिनेश गुप्ता, अध्यक्ष, शेखावाटी ग्रुप ऑफ कंपनीज, जयपुर



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