अमेरिका के टैरिफ बढ़ोतरी के बाद भी भारत का मेक इन इंडिया का विजन निरंतर आगे कदम बढ़ा रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण पिछले दिनों जारी की गई रिपोर्ट है। भारत में एप्पल आईफोन का उत्पादन वित्त वर्ष, 2024-25 में सालाना आधार पर 60 प्रतिशत बढक़र 1.89 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इस कुल उत्पादन में से एप्पल ने भारत से 1.5 लाख करोड़ रुपए मूल्य के आईफोन का निर्यात किया है। अमेरिका-चीन टैरिफ वार छिडऩे के साथ ही भारत में एप्पल के उत्पादन में और तेजी आने की उम्मीद है, जिसके परिणामस्वरूप निर्यात में भी इजाफा देखने को मिल सकता है। जहां भारत में निर्मित स्मार्टफोन पर अमेरिकी शुल्क काफी कम है, इस कारण से एप्पल जैसी कंपनियों के लिए देश में उत्पादन बढ़ाना चीन के मुकाबले अधिक फायदेमंद होगा। पर आने वाले समय में लगता है ट्रंप प्रशासन स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के साथ सेमीकंडक्टर पर भी अलग-अलग क्षेत्र आधारित टैरिफ लगाए जाने की प्लांनिग कर रहा है। तमिलनाडु में स्थित एप्पल के आईफोन का उत्पादन करने वाली फॉक्सकॉन यूनिट की निर्यात में हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत थी, वहीं विदेश शिपमेंट में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी। पिछले वित्त वर्ष में फॉक्सकॉन की आईफोन फैक्ट्री के निर्यात में करीब 40 फीसदी से अधिक की बढ़त देखने को मिली है। वहीं अन्य 22 प्रतिशत आईफोन का निर्यात वेंडर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से आया, जिसने कर्नाटक में विस्ट्रॉन स्मार्टफोन फैक्ट्री का अधिग्रहण किया है। वहीं टाटा समूह देश में आईफोन का एक प्रमुख उत्पादक बनकर उभरा है। दक्षित कोरियाई कंपनी सैमसंग की कुल निर्यात में हिस्सेदारी 20 प्रतिशत के करीब है। वर्ष, 2024-25 के दौरान स्मार्टफोन निर्यात 20 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। जहां केंद्र सरकार की पीएलआई स्कीम के कारण देश के निर्यात को बढ़ावा मिला है और आयात में कमी आई है। ऐसे में लगता है कि आने वाले समय में मेक इन इंडिया विजन को लेकर कामयाबी मिल सकेगी।

