बिजनेस रेमेडीज/जयपुर।डोनाल्ड ट्रंप का दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति बनना भारत के लिए व्यापार में नई चुनौतियां ला सकता है। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने भारत को बड़ा (व्यापार) अपराधी कहा था, जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि उनके पहले कार्यकाल के व्यापार तनाव फिर उभर सकते हैं। वित्त वर्ष, 2023 में भारत ने अमेरिका को 78.54 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया था। वहीं अप्रैल-नवंबर, 2023 के दौरान भारत ने अमेरिका को 50.34 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया था। अब देखना यह है कि टं्रप सरकार आने वाले समय पर भारत पर निर्यात पर कितना टैरिफ लगा सकती है? वैसे मौजूदा दौर में अमेरिकी सरकार द्वारा टैरिफ बढ़ाने के संकेत भी मिल रहे हैं। वहीं एक ओर भारतीय उद्यमियों को सकारात्मक सोच भी है, उन्हें लगता है कि ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने से भारत का निर्यात ग्रो करेगा।
अमेरिका को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुएं
भारत द्वारा अमेरिका को निर्यात किए जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में मोती, अर्ध-कीमती और बहुमूल्य पत्थर,दवा निर्माण और जैविक, पेट्रोलियम उत्पाद, सोना और अन्य कीमती धातु के आभूषण, आरएमजी कपास, इंजीनियरिंग सामान, रत्न और आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं। वहीं भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार में भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष है। भारत से अमेरिका को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में चावल और परिष्कृत पेट्रोलियम भी शामिल है।
भारत के लिए टैरिफ का खतरा
अगर ट्रंप की नीतियां लागू होती हैं, तो यह उनके पहले कार्यकाल की तरह व्यापार पर असर डाल सकती हैं। पहले कार्यकाल में ट्रंप ने ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप और ट्रांसअटलांटिक ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट पार्टनरशिप जैसी समझौतों को खत्म कर दिया था, नॉर्थ अमेरिकन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को दोबारा तय किया और कई टैरिफ लगाए थे।
‘चाइना प्लस वन’ रणनीति भारत के लिए फायेदमंद
कड़े व्यापार रवैये के बावजूद ट्रंप का दूसरा कार्यकाल भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के कार्यकाल में भारत पर अमेरिकी व्यापार सरप्लस की जांच और संभावित प्रतिबंध लगाने का दबाव रहेगा। इसके बावजूद, अमेरिका की ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति भारत के लिए अवसर ला सकती है। ‘चाइना प्लस वन’ एक व्यापार रणनीति है, जिसमें कंपनियां चीन पर निर्भरता घटाने के लिए अन्य देशों, जैसे भारत में अपने संचालन को बढ़ा रही हैं। ट्रंप के पहले कार्यकाल में चीन से आयातित सामान पर टैरिफ और मैन्युफैक्चरिंग को घरेलू स्तर पर लाने पर जोर के चलते यह रणनीति तेजी से उभरी थी। इस बार भी ट्रंप की वापसी से यह रुख और मजबूत हो सकता है, जिससे भारत जैसे देशों में निवेश और सप्लाई चेन विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।
व्यापार और ट्रंप की नीतियां
ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान इकोनॉमिक और ट्रेड पॉलिसीज में अमेरिका को सर्वोपरि रखा था। कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों से अमेरिका को बाहर कर दिया था। इस बार भी ट्रंप प्रशासन अमेरिका केंद्रित पॉलिसीज पर ही जोर देगा। ट्रंप ने हाल ही में भारत पर आयात शुल्क बढ़ाने की बात कही थी। ऐसे में ट्रंप के नए आयात शुल्कों से भारत के आईटी, फार्मास्यूटिकल और टेक्सटाइल क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।
बढ़ सकती हैं भारतीय कामगारों की मुश्किलें
पिछले कार्यकाल में ट्रंप का आप्रवासन पर कठोर रुख विशेषकर वीजा कार्यक्रम पर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने विदेशी कामगारों के लिए वेतन कम करने और अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया था, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों और टेक्नोलॉजी कंपनियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा। यदि यह नीति फिर से लागू होती है, तो इसका असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है और भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में नौकरी की संभावनाएं कम हो सकती हैं।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
भारत-अमेरिका के बीच रक्षा और सैन्य सहयोग पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुआ है। ट्रंप प्रशासन के नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग और बेहतर व मजबूत होने की संभावनाएं हैं। ट्रंप के पिछले कार्यकाल में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन का प्रभाव कम करने के लिए अमेरिका, भारत, जापान और आस्ट्रेलिया के बीच सुरक्षा साझेदारी क्वाड समूह के जरिये मजबूती दी गई थी। वहीं चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ तनाव के बीच अतिरिक्त संयुक्त सैन्य अभ्यास, हथियारों की बिक्री और टेक्नोलॉजी का हस्तांतरण भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर सकता है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के संबंध मधुर होने के कारण भारत के व्यापार में इसका अच्छा प्रभाव पड़ेगा। चीन को कमजोर करने के लिए अमेरिका, भारत के साथ निरंतर हाथ बढ़ाने का प्रयास करता रहेगा और यहां अपने निवेशकों को भेजकर मैन्युफैक्चरिंग यूनिटें भी डवलप करेगा।-सुरेश अग्रवाल, अध्यक्ष, फोर्टी
ट्रंप का सबसे पहला कदम स्वयं की इकोनॉमी बढ़ाने का रहेगा। वह नहीं चाहेगा कि कोई दूसरा देश उसकी टक्कर में आए। इसके लिए वह प्रयास प्रतिस्पर्धी चाइना व रशिया पर बंदिशें लगाने का करेगा। इसका फायदा जरूर भारत के व्यापारियों को हो सकता है,क्योंकि चाइना का रूख भारत की तरफ हो सकता है। आज भारत में रिचर्स और डवलपमेंट की भारी कमी है, उसे पूरी करने की जरूरत है।
-दिग्विजय ढाबरिया, अध्यक्ष, पीएचडी चैम्बर
ट्रंप के दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति चुने जाने से भारत के व्यापार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा,क्योंकि वह चाहेगा कि प्रतिस्पर्धी चीन को हटाकर भारत से मजबूत रिश्ते कायम हो ताकि चीन से अमेरिका की निर्भरता कम से कम हो सके। अमेरिका भी भारत के साथ निर्यात पर पूरा जोर देगा।
-दिनेश गुप्ता, प्रेसिडेंट, शेखावाटी ग्रुप ऑफ को कम्पनीज
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने से भारत के व्यवसाय पर कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं, जो उनकी नीतियों और उनके अमेरिका
फस्र्ट एजेंडे पर निर्भर करते हैं। भारत से निर्यात होने वाले कुछ उत्पादों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई जा सकती है, खासतौर पर स्टील, फार्मास्युटिकल्स और टेक्सटाइल उत्पादों पर। इससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान हो सकता है और उनकी प्रतिस्पर्धा अमेरिकी बाजार में घट सकती है। भारतीय आईटी सेक्टर को आउटसोर्सिंग कार्यों में कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनके राजस्व पर प्रभाव पड़ सकता है व एच-वीबी वीजा नियमों में सख्ती से भारतीय पेशेवरों को अमेरिका में काम करने में दिक्कत हो सकती है। साथ ही अवैध आव्रजन रोकने के साथ-साथ कुशल श्रमिकों के लिए वीजा नियम सख्त किए जा सकते हैं। ट्रम्प प्रशासन में भारत के साथ रक्षा निर्यात और ऊर्जा सहयोग बढ़ सकता है। ट्रंप की नीतियों से भारत के व्यवसाय पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव पड़ सकते हैं। यह मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को किस तरह से आगे बढ़ाया जाता है।
-आलोक अग्रवाल, निदेशक, उत्तम (भारत) इलेक्ट्रिकल्स प्राइवेट लिमिटेड व उपाध्यक्ष,
उत्तरी क्षेत्र एवं पूर्व अध्यक्ष, डीटी डिवीजन आईईईमा, दिल्ली और महासचिव, राजस्थान ट्रांसफार्मर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, जयपुर
डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में दोबारा चुने जाने से वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य पर सकारात्मक प्रभाव पडऩे की उम्मीद है। उनके पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने व्यापार को बढ़ावा देने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई। कोविड-19 महामारी के कठिन समय में, उनकी आर्थिक नीतियों और व्यापार-केंद्रित दृष्टिकोण ने न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की, बल्कि अन्य देशों के साथ व्यापारिक साझेदारी को भी प्रोत्साहित किया। भारत के लिए डोनाल्ड ट्रंप का पुन: राष्ट्रपति चुना जाना एक बड़ा अवसर है। उनकी व्यापार और निवेश को लेकर स्पष्ट और प्रगतिशील सोच ने पहले भी भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था। ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ निवेश, प्रौद्योगिकी और व्यापारिक सहयोग को प्राथमिकता दी, जिससे भारतीय उद्योगों और अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ हुआ। डोनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक सोच और नीतियां अमेरिका और भारत दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकती हैं। उनका व्यापार के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा भर सकता है। यह सहयोग न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को और सुदृढ़ करेगा।
-नीरज लुणावत, मानद् सचिव, ज्वैलर्स एसोसिएशन, जयपुर
पिछले १० सालों में भारत की भूगोलिक यानि की राजनीति, डेमोक्रेसी में काफी बदलाव आया है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे समझा और इसे दूर करने के प्रयास में जुट गए। इसी के मद्देनजर भारत की जनता को बोझ ना मानकर इसे एक सम्पति के रूप में देखा और भारत को आगे बढ़ाने में जुट गए। भारत में बहुत बड़ा बाजार है। इसे भुनाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों की खुबियों और कमियों को समझकर प्रतिस्पर्धी देशों से मुकाबले के लिए अपनी नीतियों में बदलाव लाए। आज अमेरिका और भारत फस्र्ट की नीति पर है, जहां अमेरिका से भारत के नजदीकी संबंध रहे हैं, ऐसे में भारत और अमेरिका के संबंध मधुर ही रहेंगे। दोनों देश जीत के सौदे के कदम पर ही निरंतर आगे बढ़ेंगे।
-सुनील दत्त गोयल, महानिदेशक, इम्पीरियल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री जयपुर, राजस्थान
भारत का बहुत बड़ा मार्केट है, अमेरिका नहीं चाहेगा कि वह ऐसी पॉलिसी लाए जिससे भारत को नुकसान हो। वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी ट्रंप के अच्छे संबंध रहे हैं, ऐसे में वह भारत के व्यापार को बढ़ाने के लिए हर तरह से सहयोग करनी की पहल करेंगे। चुनावों में ट्रंप ने इंडियन वोटरों को भी काफी महत्व दिया था। वहीं भारत की अर्थव्यवस्था विकासशील है, ऐसे में वह चाइना को कमजोर करने के लिए भारत में कई इंडस्ट्री लगाने के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करेगा।
-सुरेश कालानी, अध्यक्ष, राजस्थान इलेक्टोनिक्स ट्रेडर्स एसोसिएशन
कुंजेश कुमार पतसारिया




